हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बागी विधायक चैतन्य शर्मा के पिता राकेश शर्मा और निर्दलीय विधायक आशीष शर्मा की अंतरिम जमानत 1 अप्रैल तक बढ़ा दी है। इन दोनों के खिलाफ राज्यसभा चुनाव के दौरान बड़े स्तर पर पैसों के लेन-देन और साजिश रचने का आरोप लगा है। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश रंजन शर्मा ने की। आरोपियों के वकील ने अदालत को बताया कि राकेश शर्मा और आशीष शर्मा की तबीयत ठीक नहीं है, जिसके चलते वह 15 मार्च को बालूगंज थाने में पेश नहीं हो सके।
सरकार की तरफ से दलील दी गई कि आरोपी पुलिस की कार्रवाई में सहयोग नहीं कर रहे हैं। कोर्ट के आदेश के बावजूद दोनों आरोपी 15 मार्च को बालूगंज थाने में पेश नहीं हुए। इन दोनों आरोपियों ने प्रदेश सरकार को गिराने के लिए सुनियोजित तरीके से षड्यंत्र रचा है। बड़े स्तर पर पैसों का लेन-देन हुआ है, जिसके चलते आरोपियों को जमानत न दी जाए। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपियों को पुलिस की कार्रवाई में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।
सहयोग न करने की सूरत में इन दोनों की अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी। पुलिस ने शिमला के बालूगंज थाना में इन दोनों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 171ए, 171सी, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 व 8 के तहत मामला दर्ज किया है। यह एफआईआर कांग्रेस के दो विधायकों की ओर से दी गई शिकायत के आधार की गई है। बता दें कि चैतन्य शर्मा के पिता राकेश शर्मा उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं।