शीना बोरा मर्डर केस में आरोपी इंद्राणी मुखर्जी ने कहा कि जब मैं जेल से वापस आई तो मेरे बच्चों ने मुझे स्वीकार नहीं किया, यही मेरे लिए सबसे दुखद पल था। मैं कई दिन तक मानसिक दबाव में रही। इंद्राणी के तीन बच्चे हैं, जिसमें एक की हत्या हो गई है। पत्रकार एवं स्तंभकार बच्ची करकरिया ने उनसे उनकी किताब पर खुलकर संवाद किया। इंद्राणी ने अपनी किताब ‘अनब्रोकन : द अनटोल्ड स्टोरी’ पर खुलकर बात की। मौका था कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के पहले दिन का।
इंद्राणी ने कहा कि जब मेरे पहला बच्चा हुआ तो मैं 15 साल की थी। उस समय मैं बच्चे संभालने के लिए तैयार नहीं थी। ऐसे में जब बच्चे हो गए तो मुझे पता नहीं था कि क्या करना है। शीना के साथ हुए दुष्कर्म का जब मुझे पता चला तो मैं हैरान रह गई। उस समय शीना 15 साल की थी और मै 31 साल की।
मेरी बेटी मुझमे जिंदा है
इस दौरान बच्ची करकरिया ने उनसे पूछा कि आपने अपनी किताब में लिखा है कि उनकी बेटी जिंदा है, यह आप कैसे कह सकती हैं। इस पर इंद्राणी ने कहा कि वह मुझमे जिंदा है। इसलिए मैं सभी से कहती हूं कि वह मरी नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम और डीएनए की रिपोर्ट में भी खुलकर कुछ सामने नहीं आया था। ऐसे में उन्होंने यह बातें उठाई थीं।