देश के पहले मतदाता को खोजने का काम चुनाव आयोग ने वर्ष 2007 में उस समय किया, जब मनीषा नंदा हिमाचल की मुख्य चुनाव अधिकारी थीं। इसके बाद इलेक्टोरल रोल खंगाले गए। मनीषा नंदा के मुताबिक, वह जानती थीं कि आजाद भारत में किन्नौर में सबसे पहले मतदान हुआ था। उनके हाथ फोटो मतदाता पहचान पत्र लगे, जिसमें उस समय 90 साल के श्याम सरण नेगी थे। मनीषा नंदा ने नेगी की उम्र देखने के बाद किन्नौर की तत्कालीन जिला उपायुक्त एम सुधा देवी को तथ्यों की पुष्टि करने के लिए कहा। डीसी ने श्याम सरण नेगी और उनके परिवार से बात की।
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नेगी और उनके बेटे चंद्र प्रकाश ने आजाद भारत के पहले चुनाव में वोट डालने की बात कही। इसके बाद करीब तीन से चार महीने शिमला से दिल्ली तक चुनाव आयोग की फाइलें खंगाली गईं। आखिरकार पुष्टि हुई कि आजाद भारत के पहले चुनाव में पहला वोट मास्टर श्याम सरन नेगी ने ही डाला था। उस दौरान सुधा देवी ने नेगी का इंटरव्यू भी लिया था। साल 2010 में तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला दिल्ली से किन्नौर आए और श्याम सरण नेगी को सम्मानित भी किया था।