हिमाचल के प्रदेश मंडी जिला में बड़ादेव हुरंग नारायण की प्राचीन स्थली चौहारघाटी के हुरंग गांव में पांच वर्ष के उपरांत मनाए जाने वाले काहिका उत्सव को लेकर घाटी के लोगों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है।
बुधवार को हुरंग गांव लगभग आधा दर्जन से अधिक देवरथों के आगमन से देवमयी बन जाएगा। तीन दिन तक चलने वाले काहिका उत्सव को देखने के लिए हुरंग गांव में हजारों लोग देव आस्था के चलते हाजिरी भरेंगे। काहिका उत्सव में लोग पांपों से मुक्ति के लिए नरवेदी पंडितों के हाथों छिद्रा करवाकर स्वयं को धन्य करेंगे।
देव आस्था है कि भगवान कृष्ण रूपी हुरंग नारायण ने जब धरती पर अवतार लिया था तो उन्होंने स्वयं का छिद्रा करवाने (पापों से मुक्ति ) के लिए देव लोक से नरवेदी पंडितों को सृष्टि पर बुलाया था। हर पांच वर्ष के उपरांत आज भी इस प्रथा को प्राचीन परंपरा के अनुसार हुरंग गांव में निभाया जाता है।
इससे पहले वर्ष पधर के सुराहण गांव में काहिका उत्सव होता है और दुसरे वर्ष हुरंग काहिका होता है। सुराहण काहिका में देव हुरंग नारायण मुख्य भुमिका निभाते हैं जबकि हुरंग काहिका में देव नारायण के बड़े भाई भगवान बलराम रूपी देव घड़ौनी नारायण, घाटी वजीर देव पशाकोट, देव पेखरू गहरी, देव त्रैलू गहरी, देव द्रुण गहरी, देव कालधार स्वाड़ तथा देव सिल्ह गहरी इस उत्सव में मेहमान देवता के रूप में हाजिरी भरते हैं।
बुधवार को हुरंग पहुंचने पर बड़ादेव हुरंग नारायण सभी देवताओं स्वागत करेंगे। काहिका का समापन प्रथम अगस्त को होगा, जिस दिन देव शक्ति से मुर्छित होते हुए नड़ पहले मृत देह को प्राप्त होगा, बाद में हुरंग गांव में उसकी अर्थी की परिक्रमा करवाई जाएगी। नड़ परिवार के सदस्यों की ओर से बाद में देव हुरंग से नड़ को जिंदा करने की फरियाद होगी और फिर देव शक्ति से नड़ मर कर जिंदा होगा।