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नोटबंदी से टूटने लगी हिमाचल की सबसे बड़ी मंडी

Sat, 19 Nov 2016 12:02 AM IST
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, सोलन
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हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी कृषि उपज सब्जी मंडी में नोटबंदी के चलते कारोबार पचास फीसदी तक गिर गया है। सालाना 400 करोड़ का कारोबार करने वाली सोलन की इस मंडी में आढ़तियों और किसानों को काफी परेशानी हो रही है। प्रदेश के अन्य जिलों के किसान पैदावार लेकर मंडी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। आसपास के क्षेत्रों से जो पैदावार लेकर आ रहे हैं उन्हें देने के लिए आढ़तियों के पास 100, 50 या 2000 के नोट नहीं हैं। 
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लिहाजा, चेक के माध्यम से पेमेंट की जा रही है। ज्यादातर कारोबार अब उधारी पर चल रहा है। सबसे बड़ी परेशानी उन बड़े किसानों के लिए है जिन्होंने लाखों का सेब, टमाटर और शिमला मिर्च आदि बेच 1000-500 के नोटों में कैश लिया है। इन किसानों को ये नोट बदलवाना अब सिरदर्द बन गए हैं। 

आलम यह है कि किसान के पास मंडी तक माल पहुंचाने के लिए किराया देने के लिए पैसे नहीं है। नजदीक के किसान जैसे-तैसे बसों आदि में सामान पहुंचा रहे हैं। अपर शिमला और लोअर हिमाचल से पैदावार सोलन मंडी तक नहीं पहुंच पा रही। हालांकि, अब सेब और टमाटर जैसी मुख्य फसलों का सीजन खत्म हो रहा है। अदरक, शिमला मिर्च और फ्रासबीन आदि का सीजन चल रहा है।
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मंडी में सन्नाटा, आढ़ती मायूस
दिन शुक्रवार। स्थान सोलन सब्जी मंडी बाईपास। दोपहर के करीब डेढ़ बजे हैं। मंडी पूरी तरह से सुनसान पड़ी है। कुछ स्थानों पर बोरियां और क्रेट लगी हैं। बाकी खाली है। मोही राम और पद्म सिंह के काउंटर पर अमूमन काफी भीड़भाड़ रहती है। पद्म सिंह मटर एक बोरी से दूसरी बोरी में डलवा रहे हैं।

नोटबंदी का असर पूछने पर वह कहते हैं कि कारोबार काफी गिर गया है। बाहरी जिलों से माल आना बंद है। लोकल किसान से उधार या चेक के माध्यम से पेमेंट की जा रही है। बाहरी राज्यों की मंडियों में सामान भेजना मुश्किल हो गया है। 35-50 फीसदी तक

कारोबार में गिरावट है। दुकान नंबर 6 के मालिक राकेश कुमार कहते हैं कि दुकान बंद करने की नौबत आ गई है। सामान न तो किसान ला रहे हैं न ही उन्हें पेमेंट करने के लिए पैसे हैं। चेक भी तभी देंगे जब अकाउंट में पैसा है। अब तक पूरा दिन बेकार निकला है। 

किसान तंगहाली में, किराया तक नहीं
भगत राम सिंह के काउंटर पर ठियोग से मटर लेकर कुछ लोग आए हैं। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि बड़ी मुश्किल से गाड़ी का किराया हो पाया है। काउंटर संचालक कमल ने बताया कि किसानों के पास बस किराए और गाड़ी के लिए पैसा नहीं है। सोचा था कि कुछ दिन के बाद नोटबंदी का असर छंट जाएगा। लेकिन अब स्थिति बदतर हो रही है। मंडी में मौजूद घट्टी के किसान राकेश कश्यप का कहना है कि वह पैदावार बेच चुके हैं। 

उन्होंने सारी पेमेंट कैश के माध्यम से ली है। लेकिन टमाटर और अन्य सब्जियों के बदले में नोटबंदी से पहले आढ़तियों से लाखों उठाने वाले किसान मुश्किल में हैं। दीन चंद, मनोज कुमार और प्रताप का कहना है कि बसों में पैदावार लानी पड़ रही है। बड़े वाहनों के लिए पैसा नहीं है। पैसे के बिना काम मुश्किल हो गया है। 

जारी की गई हैं हिदायत
मंडी समिति सोलन के सचिव प्रकाश कश्यप का कहना है कि नोटबंदी के दूसरे दिन आढ़तियों की बैठक में  किसानों को किसी तरह की परेशानी न देने की हिदायत दी थी। नोटबंदी के कारण मुश्किलें हुई हैं लेकिन कारोबार हो रहा है। किसानों से चेक, कैश या उधारी के माध्यम से खरीद हो रही है। आढ़तियों और उनके आगे कारोबारियों में सिस्टम नहीं बैठ पा रहा है। इसी वजह से कारोबार मंदा है। अगर नोटबंदी सेब और टमाटर के सीजन के दौरान होती तो हालत चिंताजनक होती। 

पाकिस्तान भी जाता यहां से सामान
सोलन में बाईपास स्थित कृषि उपज सब्जी मंडी हिमाचल की सबसे बड़ी मंडी है। सालाना करीब 400 करोड़ का कारोबार करने वाली इस मंडी में सोलन, शिमला, सिरमौर जिलों के अलावा बिलासपुर, कुल्लू, कांगड़ा और हमीरपुर से भी पैदावार पहुंचती है। टमाटर पैदावार के मशहूर सोलन जिले की इस मंडी से सामान देश की अन्य मंडियों में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान भी जाता रहा है।
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उत्पाद            सालाना कारोबार 
सेब               180 करोड़
टमाटर            70 करोड़
शिमला मिर्च     30 करोड़
भिंडी-फ्रासबीन   20 करोड़
अन्य पैदावार    100 करोड़
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