वर्ष 2017 में वहां से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह आईएमए आए। इस साल आईएमए से पासआउट होकर सेना में अफसर बन गए। उनके पिता यशमीर सिंह सरकारी कॉलेज में लेक्चरर हैं, जबकि मां सुनीता देवी भी शिक्षिका हैं। उनके दादा जैशी राम सेना से बतौर कैप्टन रिटायर्ड हैं। ले. अर्जुन ठाकुर का कहना है कि उनके दादा ही उनके आदर्श थे। उन्होंने सैन्य जीवन जीने के प्रति प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि देश की सेना में जाना उनके लिए सबसे खुशी का दिन है। अब आरआईएमसी, एनडीए और आईएमए से मिले संस्कारों को वह अपनी सेवाओं में उतारेंगे। एनडीए में प्रेसीडेंट गोल्ड मेडल से सम्मानित अर्जुन ठाकुर को आईएमए के सर्वोच्च स्वॉर्ड ऑफ ऑनर के साथ ही गोल्ड मेडल से भी नवाजा गया।
इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून में शनिवार को आयोजित पासिंग आउट परेड में हिमाचल के कैडेटों की मौजूदगी दमदार तरीके से दर्ज हुई। एकेडमी से मित्र राष्ट्रों के 80 कैडेटों समेत कुल 437 कैडेट पास आउट हुए।
इस बैच के माध्यम से उत्तर प्रदेश (53), हरियाणा (51), बिहार (36), उत्तराखंड (26), दिल्ली (25) और महाराष्ट्र (20) के बाद हिमाचल प्रदेश ने देश को सबसे ज्यादा 15 सैन्य अफसर दिए।
सबसे खास बात है कि आईएमए की पासिंग आउड परेड में हिमाचल के ही कैडेट एडजुडेंट अर्जुन ठाकुर को दो प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं। अर्जुन ठाकुर को स्वोर्ड ऑफ ऑनर और गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया।
उधर, हिमाचल से सैन्य अफसर बने युवाओं के परिवार गदगद हैं। इन घरों में आस पड़ोस और रिश्तेदारों से बधाई देने वालों का तांता लग गया है। शिमला निवासी हितेश जंटा के सेना में अफसर बनने पर पूरा फूला नहीं समा रहा।
पिता मदन जंटा ने बताया कि वे बेटे को सेना में अफसर बनाना चाहते थे। इसके लिए हितेश की पढ़ाई सैनिक स्कूल में कराई। हितेश बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही फौजियों की वर्दी काफी आकर्षित करती थी। आज पिता के साथ ही मेरा भी सपना पूरा हो गया। मां रचना कहती हैं कि बेटे को सेना की वर्दी में देखकर बहुत अच्छा लग रहा है।