इन उपकरणों से मस्तिष्क के सीमित हिस्सों की गतिविधियों का ही पता चल पाता है, जबकि 256 चैनल ईईजी में पूरे सिर पर बड़ी संख्या में सेंसर लगाए जाते हैं, जिससे मस्तिष्क के लगभग प्रत्येक हिस्से की विद्युत गतिविधियों की रिकॉर्डिंग संभव हो जाती है। इससे शोधकर्ताओं को दिमागी तरंगों की सूक्ष्म से सूक्ष्म जानकारी प्राप्त होती है और गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध हो जाती है। मिर्गी, ब्रेन ट्यूमर, नींद संबंधी विकारों, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों और संज्ञानात्मक गतिविधियों पर होने वाले शोध में यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो रही है। अधिक चैनलों के कारण मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों के बीच होने वाले संचार और उनकी कार्यप्रणाली का विश्लेषण अधिक सटीकता से किया जा सकता है। इससे शोधकर्ताओं को मस्तिष्क की जटिल संरचना और कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल रही है।
सम्मेलन में उपकरण का प्रदर्शन कर रहे अश्वनी राव ने बताया कि 256 चैनल ईईजी प्रणाली सलाइन आधारित तकनीक पर कार्य करती है, जिससे परीक्षण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान और अधिक प्रभावी हो जाती है। यह प्रणाली उच्च गुणवत्ता वाले डाटा संग्रहण के साथ रियल टाइम मॉनीटरिंग की सुविधा भी प्रदान करती है। शोध के दौरान प्राप्त आंकड़ों का उपयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण में भी किया जा सकता है। बताया कि पहले मुल्तानी मिट्टी से ईईटी करते थे लेकिन अब स्लाइम बेस तकनीक आई है।