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आईआईटी मंडी: साइबर खतरों और डाटा की सुरक्षा करेगा नया सॉफ्टवेयर, बैंक और फोरेंसिक कंपनी में लागू

Wed, 27 Mar 2024 12:31 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी

सार

आईआईटी मंडी में एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है जो साइबर खतरों से बचाएगा और संवेदनशील डाटा की सुरक्षा भी करेगा। इस तकनीक के लिए एक पेटेंट प्रदान किया गया है। इसे एक बैंक और एक फोरेंसिक कंपनी में लागू किया जा चुका है। 
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आईआईटी मंडी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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देश और दुनियाभर में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच संवेदनशील डाटा की सुरक्षा बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। आईआईटी मंडी ने इसका समाधान खोज निकाला है। आईआईटी मंडी में एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है जो साइबर खतरों से बचाएगा और संवेदनशील डाटा की सुरक्षा भी करेगा। इस तकनीक के लिए एक पेटेंट प्रदान किया गया है। इसे एक बैंक और एक फोरेंसिक कंपनी में लागू किया जा चुका है।  इसके अतिरिक्त, अनुसंधान टीम वर्तमान में सभी सरकारी योजनाओं में सिंगल साइन-ऑन (एसएसओ) के लिए सिस्टम को तैनात करने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के साथ चर्चा कर रही है।

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आईआईटी मंडी के शोधकर्ता इस डीप एल्गोरिदम के सहयोग से एडैपआईडी पर काम कर रहे हैं, जो डाटा सुरक्षित करने की प्रमाणीकरण सफलता है। आईआईटी मंडी में सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (सीएआईआर) के डॉ. अमित शुक्ला और डीप एल्गोरिदम के जेपी मिश्रा ने इस टूल के विकास का नेतृत्व किया है। बता दें कि आज के डिजिटल युग में साइबर खतरों के खिलाफ संवेदनशील डाटा की सुरक्षा करने की कठिन चुनौती का सामना करना पड़ता है। पासवर्ड और स्थैतिक सुरक्षा उपायों पर निर्भर पारंपरिक प्रमाणीकरण विधियां अपर्याप्त साबित होती हैं। 

इससे संगठनों को उल्लंघनों का खतरा होता है और उपयोगकर्ताओं पर बोझिल 
पहुंच प्रक्रियाओं का बोझ पड़ता है। ऐसे में पासवर्ड और ओटीपी पर निर्भर पारंपरिक प्रमाणीकरण विधियां भी साइबर का शिकार हो रही हैं, जिससे डाटा की सुरक्षा की गारंटी नहीं होती है।

ऐसे काम करता है सॉफ्टवेयर
एडैपआईडी अद्वितीय सुरक्षा उपायों को व्यावहारिक और शारीरिक बायोमीट्रिक्स की शक्ति का उपयोग करके सुरक्षित प्रमाणीकरण में एक आदर्श बदलाव की शुरुआत करेगा। यह पासवर्ड और ओटीपी की आवश्यकता को समाप्त कर देगा। उभरते खतरों के खिलाफ सुरक्षा को मजबूत करते हुए उपयोगकर्ता पहुंच प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करेगा। डॉ. अमित शुक्ला ने कहा कि हमारा सिस्टम सुरक्षित प्रमाणीकरण को फिर से परिभाषित करेगा, पासवर्ड पर निर्भरता को प्रभावी ढंग से समाप्त करेगा और निर्बाध निरंतर प्रमाणीकरण शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि एडैपआईडी के साथ, हमारा लक्ष्य न केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल में क्रांति लाना है, बल्कि संगठनों को डिजिटल युग की जटिलताओं को अटूट आत्मविश्वास के साथ नेविगेट करने के लिए सशक्त बनाना है। 
 
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इन सेवाओं में मिलेगा फायदा
इस सिस्टम से वित्तीय सेवाओं, सरकार, प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे उद्योगों में फैले धोखाधड़ी, अनाधिकृत पहुंच और फिशिंग हमलों सहित साइबर खतरों का डर कम होगा। इसके अलावा उपयोगकर्ता के व्यवहार में प्रमाणीकरण और समझदार विसंगतियों का सबसे मजबूत रूप प्रस्तुत करके, एडैपआईडी संगठनों को एक गतिशील और अनुकूल सुरक्षा मुद्रा से लैस करता है।
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