सूबे के पांवटा साहिब, कालाअंब, डमटाल, परवाणू, सुंदरनगर, बद्दी और नालागढ़ जहां पार्टीकुलेट मैटर (पीएम) साठ से ज्यादा है, वहां प्रदूषण के कारणों की जांच आईआईटी कानपुर करेगा। नदियों के प्रदूषित हिस्सों को अलग-अलग संस्थानों को दिया जा रहा है।
इनमें सुखना, सिरसा और अश्वनी के प्रदूषित हिस्सों के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी को और बाकी हिस्सों को आईआईटी रुड़की, आईआईटी मंडी और आईआईटी कानपुर को दिया जाएगा।
अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन आरडी धीमान ने बताया कि सभी एजेंसियों को अलग अलग शहर और नदियों के हिस्से शोध के लिए दिए जाएंगे। इसके बाद इनकी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभागों को प्रदूषण के कारणों को खत्म करने के लिए निर्देश दिए जाएंगे।