आईजीएमसी अस्पताल के परिसर में इस्तेमाल सिरिंज बेचने को लेकर हुए खुलासे के बाद सीएम वीरभद्र सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं। रविवार को संकट मोचन मंदिर के प्रवेश द्वार के लोकार्पण अवसर पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि शनिवार रात दस बजे तक मैं एक कार्यक्रम में आईजीएमसी में मौजूद था, बावजूद इसके इतने गंभीर मामले को लेकर मुझे अवगत नहीं करवाया गया।
सुबह अखबार पढ़ने पर इस मामले की जानकारी मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल परिसर के अंदर इस्तेमाल सिरिंज बेचा जाना बेहद गंभीर मामला है। इस मामले के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच होगी। सभी संलिप्त लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आईजीएमसी प्रबंधन के खिलाफ भी जांच होगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार अफसरों पर भी सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने उपायुक्त दिनेश मल्होत्रा से भी मामले का अपडेट लिया और दोषियों पर जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए।
फिर मिली इस्तेमाल की गई 25 सिरिंज
आईजीएमसी अस्पताल में इस्तेमाल सिरिंज को बेचने के खौफनाक खेल में टेस्ट टयूब काउंटर से 25 यूज्ड सिरिंज बरामद हुई हैं। पहली नजर में ऐसा लग रहा है कि अस्पताल में ही इस्तेमाल की गई सिरिंज वापस इस काउंटर पर आ जाती थीं।
काउंटर के भीतर इस्तेमाल की गई सिरिंज को क्यों रखा गया था यह एक बड़ा सवाल है। अमूमन ब्लड सैंपल लेने के बाद सूई को तोड़ दिया जाता है। लेकिन टेस्ट ट्यूब काउंटर में खुले में मिली इस्तेमाल की गई सिरिंज की सूई सही सलामत थी। टेस्ट टयूब काउंटर में इन्हें कौन लेकर आया यह जांच का विषय है।
इस घटना से आईजीएमसी डाक्टरों में भी हड़कंप मच गया है। इमरजेंसी में आने वाले हर मरीज को विभिन्न जांचों के लिए सिरिंज मंगाई जाती थी। डाक्टर पर्ची पर सामान लिखकर मरीज व उनके तिमारदारों को इसी काउंटर पर भेजते थे।
जांच में जुटे अधिकारी
आईजीएमसी के एमएस डॉ. रमेश का कहना है कि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी सिरिंज कब्जे में ले ली गई थी। 25 इस्तेमाल की गई सिरिंज भी शामिल हैं। इनकी जांच की जा रही है कि यह कहां से कांउटर में आई। ड्रग इंस्पेक्टर अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं।
बैच का सैंपल लिया
राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह ने कहा कि सिंरिज के बैच का सैंपल ले लिया है। जांच रिपोर्ट आने तक सिरिंज का सारा स्टाक सीज किया है। अगर सैंपल फेल होता है तो नियम के मुताबिक आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
ऐसे होती है डिस्पोज ऑफ
आईजीएमसी में ब्लड टेस्ट के बाद सूई को तोड़ देते हैं। सूई को प्लास्टिक से निकालकर अलग अलग रखा जाता है। प्लास्टिक की सिरिंज को एक बड़े थैले में रखा जाता है और सूई को भी सुरक्षित जगह पर एक कंटेनेर में रखे जाते हैं। जब यह भर जाते हैं तो इन्हें बायो मेडिकल वेस्ट प्लांट में भेज दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि टेस्ट टयूब काउंटर में इस्तेमाल सींरिज कहां से पहुंच रही है?
ड्रग इंस्पेक्टर ने शुरू की जांच
मामले के खुलासे के बाद रविवार को ड्रग इंस्पेक्टर ने ट्यूब काउंटर से जब्त किए गए सामान की जांच की है। टेस्ट ट्यूब काउंटर नंबर 302(ई) से करीब 12 हजार पैकेट बंद सिरिंज, 25 इस्तेमाल की गई खुली सिरिंज और पैकेट बंद सर्जरीकल आइटम बरामद की गई है। ड्रग इंस्पेक्टर ने काउंटर संचालक के लाइसेंस चैक किए। देर शाम तक पैकेट बंद सिरिंज की जांच जारी थी।
रेडक्रास के कमरे में रखा है जब्त सामान
टेस्ट टयूब कांउटर से जब्त किया गया सामान रेडक्रास के कमरे में रखा गया है। देर शाम तक यहीं पर इनकी जांच हो रही थी।
इस्तेमाल नहीं रिजेक्ट सिरिंज है
टेस्ट ट्यूब काउंटर के संचालक प्रीतम चंदेल ने कहा कि आरोप गलत हैं। जिन 25 इस्तेमाल सिरिंज की बात की जा रही है वह रिजेक्ट सिरिंज हैं। इसलिए उन्हें खुले में साइड में रखा था। आज तक किसी को भी इस्तेमाल की गई सिरिंज नहीं बेची है।
टेंडर में साफ लिखा है कि टेस्ट ट्यूब के साथ सिरिंज भी बेच सकते हैं। काउंटर में मिली सर्जरीकल आइटम उसकी नहीं बल्कि रोगी कल्याण समिति की दुकान नंबर एक के संचालक की है। पहले भी जांच में क्लीन चिट मिली है।
मरीज टेस्ट ट्यूब काउंटर से एक पैकेट बंद सिरिंज लेकर माइक्रोबायोलॉजी में ब्लड सैंपल देने पहुंचा। टेस्ट लैब में तीन फार्मासिस्ट थे। एक फार्मासिस्ट ने जैसे ही पैकेट फाड़कर सिरिंज निकाली तो उसमें खून के धब्बे थे। इसकी सूचना उन्होंने एमएस को दी। तत्काल चार डाक्टरों की टीम बनी। टेस्ट टयूब काउंटर पर छापा मारकर सभी सिरिंज कब्जे में ले ली गई।