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गुड़िया मामला: आईजी जैदी की जमानत याचिका रद्द, वापस जेल भेजे गए

Fri, 24 Jan 2020 10:16 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/शिमला
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आईजी पुलिस जहूर एच जैदी(फाइल फोटो)
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बहुचर्चित गुड़िया मर्डर केस के आरोपी की पुलिस हिरासत मौत मामले में सीबीआई कोर्ट ने आरोपी आईजी पुलिस जहूर एच जैदी की जमानत रद्द कर उसे न्यायिक हिरासत में लेने का निर्देश दे दिया। 20 जनवरी को सीबीआई ने अदालत में जैदी की जमानत खारिज करने को अर्जी दी थी। साथ ही सीबीआई ने जैदी की गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी करने की भी प्रार्थना की थी।

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शिमला की तत्कालीन एसपी सौम्या सांबशिवन ने सीबीआई को एक आवेदन दायर कर कहा था कि जैदी ने उन पर अदालत में बयान बदलने के लिए दबाव डाला था। सीबीआई जांच के बाद 38 दिन के अंदर 29 अगस्त, 2017 को आरोपी जैदी को पहली बार गिरफ्तार किया था। इसके बाद वह 19 महीने हिरासत में रहा। उसे सुप्रीम कोर्ट से 6 अप्रैल, 2019 को जमानत मिली थी।

सीबीआई की अर्जी के जवाब में शुक्रवार को जैदी के वकील ने कहा कि उसके पास ऐसा कोई कारण नहीं था, जिससे वह गवाह को बयान बदलने को दबाव डालता। सौम्या के बयान के बाद 15 जनवरी, 2020 को जैदी को फिर सस्पेंड करने के बाद वह शक्तिहीन हो गया था, वह कैसे दबाव डालता। वकील ने कहा कि सीबीआई को दो फोन कॉल जो 20 मिनट और 13 मिनट तक किए, उसके बारे में जांच करनी चाहिए थी कि सौम्या और आरोपी के बीच इतनी देर किस बारे में बात हुई। 

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यह है मामला

छह जनवरी, 2020 को एडिशनल एसपी को जैदी द्वारा किए फोन के बारे में वकील ने कहा कि सौम्या को यह पूछने के लिए फोन किया था कि वह 8 जनवरी को बयान देने आ रही हैं या नहीं, ताकि आरोपी अपने क्रॉस एग्जामिनेशन को तैयार रहे। सीबीआई जज सुशील कुमार गर्ग ने कहा कि आरोपी जैदी ने बेल बांड और व्यक्तिगत बांड की शर्तों का उल्लंघन किया। उन्होंने अभियोजन पक्ष की गवाह सौम्या को डराने और दबाव डालकर बयान बदलने की कोशिश की। जैदी उच्च रैंक के अधिकारी हैं, उनसे ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती थी। ऐसे में वह दूसरे गवाहों पर भी दबाव डाल सकते हैँ। यह कहते हुए अदालत ने जैदी की जमानत रद्द कर दी, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। 

शिमला के कोटखाई के एक स्कूल की छात्रा 4 जुलाई 2017 को लापता हुई। दो दिन बाद जंगल से उसकी लाश बरामद हुई थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया। इनमें सूरज नाम का एक नेपाली भी था। कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से उसकी मौत हुई थी। इस केस में सीबीआई ने आईजीपी जहूर एच जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, ठियोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफिक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया। इन आरोपियों के खिलाफ शिमला की सीबीआई कोर्ट में केस चल रहा था। वहां इनकी तरफ से कोई वकील पेश नहीं हुआ जिस कारण सुप्रीम कोर्ट ने केस चंडीगढ़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया था।
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