इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में गंभीर बीमारियों के उपचार को आ रहे मरीजों को एमआरआई टेस्ट करवाना है तो मार्च 2024 में आना होगा। अस्पताल में इन दिनों पांच माह बाद की तारीख मरीजों को दी जा रही है। इतनी लंबी तारीख से मरीज परेशान हैं। उनका कहना है कि उपचार में देरी हो सकती है और जान का भी जोखिम हो सकता है। आईजीएमसी में रोजाना हजारों मरीज उपचार के लिए आते हैं।
प्राथमिक जांच के बाद चिकित्सकों ने कई मरीजों को ब्रेन ट्यूमर, दर्दनाक मस्तिष्क की चोट, विकासात्मक विसंगतियां, मल्टीपल स्केलेरोसिस, स्ट्रोक, मनोभ्रंश, संक्रमण और सिरदर्द समेत अन्य बीमारियों का सटीक पता लगाने के लिए यह टेस्ट लिख रखे हैं। अस्पताल में रोजाना 22 मरीजों के एमआरआई होते हैं लेकिन अस्पताल में एक मशीन होने के कारण और मरीजों की संख्या बढ़ने से पांच माह बाद की तारीख दी जा रही है।
इस से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में शुक्रवार को जब एमआरआई डेट लेने के लिए मरीजों के तीमारदार काउंटर पर पहुंचे तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कुल्लू के रोहन, बिलासपुर के विवेक और शिमला के पुरुषोत्तम ने बताया कि जब उन्होंने पर्चियों पर डेट देखी तो वह पांच महीनों बाद की थी। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन को चाहिए कि वह टेस्ट जल्द करवाएं।
सीटी स्कैन की मिल रही एक दिसंबर की तारीख
आईजीएमसी में मरीजों को रूटीन में सीटी स्कैन करवाने के लिए लंबी डेट मिल रही है। अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में जहां मरीजों को डेट दी जाती है वहां पर एक दिसंबर की डेट मरीजों को दी जा रही है।
इस वजह से भी बढ़ीं दिक्कतें
अस्पताल में एक दशक से भी अधिक पुरानी एमआरआई मशीन पर टेस्ट हो रहे हैं। मशीन बीच-बीच में बंद हो जाती है। घंटों मशीन के न चलने के कारण टेस्ट नहीं हो पाते। इस वजह से रूटीन में जांच करवाने आए मरीजों को परेशानी होती है।
मशीन बार-बार बंद हो जाती है। इस वजह से मरीजों को परेशानी पेश आ रही है। अस्पताल में इमरजेंसी और वार्ड में दाखिल मरीजों के प्राथमिकता के आधार पर एमआरआई टेस्ट किए जा रहे हैं। नई एमआरआई मशीन की खरीद की प्रक्रिया भी जारी है।
- डॉ. सीता ठाकुर, प्राचार्य आईजीएमसी