मशीन खराब होने से मरीज झेल रहे हैं परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में आठ दिन से बंद पड़ी सीटी स्कैन मशीन अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। इस कारण रोजाना जांच के लिए आने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अब अस्पताल प्रबंधन ने इसे लेकर सख्ती दिखाते हुए मशीन का रखरखाव करने वाली निजी कंपनी पर प्रतिदिन 7000 रुपये जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। सीटी स्कैन मशीन को ठीक करने के लिए जरूरी स्पेयर पार्ट्स बंगलूरू से मंगवाए जा रहे हैं, लेकिन देरी के चलते अब तक मशीन को शुरू नहीं किया जा सका है। अब अस्पताल प्रबंधन ने फैसला लिया है कि जब तक मशीन पूरी तरह कार्यशील नहीं हो जाती कंपनी को हर दिन के हिसाब से जुर्माना भरना होगा।
आईजीएमसी में यह सीटी स्कैन मशीन वर्ष 2009 में स्थापित की थी। मशीन की कार्यक्षमता समय के साथ कम हो चुकी है और बीते कुछ वर्षों से यह बार-बार खराब हो रही है। पांच वर्षों में मशीन 22 बार से ज्यादा खराब हो चुकी है। इससे हर बार मरीजों को या तो निजी लैब की शरण लेनी पड़ी या फिर अस्पताल के नए भवन की तीसरी मंजिल पर लगी इमरजेंसी मशीन में स्कैन करवाने के लिए जाना पड़ रहा है। इस मशीन पर बोझ बढ़ने से मरीजों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। एक दिन में औसतन 70 मरीजों को सीटी स्कैन की जरूरत पड़ती है। निजी लैब में इसकी कीमत 2500 से 3500 तक है। अस्पताल में एक स्कैन एक हजार से 2500 में होता है। इसके अलावा बीपीएल मरीजों के लिए यह सुविधा मुफ्त है। अब अस्पताल प्रबंधन के कड़े फैसले से मशीन के जल्द ठीक होने की उम्मीद है।