शीत मरुस्थल के नाम से विख्यात लाहौल-स्पीति जिले में अब वह दिन दूर नहीं, जब यहां की वादियां शीतकालीन खेलों से गुलजार होंगी। स्पीति में आइस हॉकी के बाद अब लाहौल घाटी में आइस क्लाइंबिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षकों की टीम 23 दिसंबर से अब तक प्रशिक्षुओं को तीन बार बेसिक कोर्स का प्रशिक्षण दे चुकी है। प्रशिक्षुओं का इंटरमीडिएट कोर्स शनिवार से शुरू हो गया है। लाहौल-स्पीति में पर्यटन को पंख लगें, इस दिशा में हिमालयन एस्केपेड व हिमालयन इनीशिएटिव क्लाइंबिंग फाउंडेशन देश और प्रदेश के युवाओं को प्रशिक्षण दे रही है। प्रशिक्षण पाने के लिए हिमाचल समेत दिल्ली, बंगलूरू और उत्तराखंड के युवा लाहौल पहुंचे हैं। जमाव बिंदु से नीचे तापमान के बीच युवा आइस क्लाइंबिंग का लुत्फ उठा रहे हैं।
लाहौल घाटी के छेलिंग और मोन (कमांडर नाला) में इन युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिमला के भरत भूषण, नैनीताल के टानी और लाहौल-स्पीति के सुनील प्रशिक्षुओं को बारीकियां सिखा रहे हैं।
गौरतलब है कि लाहौल घाटी में इन दिनों माइनस पांच से दस डिग्री तापमान के बीच बाहरी राज्यों के युवा आइस क्लाइंबिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। घाटी के युवाओं का कहना है कि विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए शुरुआत हुई है। फाउंडेशन के सदस्य रिगजिन ने कहा कि विंटर स्नो फेस्टिवल के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर आइस क्लाइंबिंग के मुकाबले करवाने की योजना बनाई जा रही है। कहा कि प्रशिक्षण में ग्युसक्यर के छिमेद, केलांग पंचायत के प्रधान सोनम जगपो और युवा फाउंडेशन का सहयोग कर रहे हैं।