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Shimla News: पति की अपील खारिज, पत्नी और बेटी को देना होगा मासिक खर्चा

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रखा बरकरार
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अपीलकर्ता ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने घरेलू हिंसा के एक मामले में दाखिल अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। इस आदेश के तहत पति को अपनी पत्नी और नाबालिग बेटी को 15,000 रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था।
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यह मामला पल्लवी एवं अन्य बनाम अमन शीर्षक से दर्ज है। अपीलकर्ता अमन ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के 31 अगस्त 2024 को दिए आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में अदालत ने पत्नी पल्लवी को 10,000 रुपये और उनकी तीन वर्षीय नाबालिग बेटी को 5,000 रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण के रूप में देने का आदेश दिया था। अपील में यह तर्क दिया था कि उनकी आय सीमित है, व्यवसाय ऋण पर चल रहा है और उन पर पहले से कई वित्तीय दायित्व हैं। उन्होंने कहा कि 15,000 की राशि उनकी घोषित आय का लगभग आधा है और यह आदेश मनमाना एवं अव्यावहारिक है। हालांकि अदालत ने पाया कि अपीलकर्ता की आयकर विवरणियों (आईटीआर) के अनुसार उसकी वार्षिक आय में लगातार वृद्धि हुई है। असेसमेंट वर्ष 2022-23 में उसने 4,10,250 की वार्षिक आय घोषित की थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जिससे यह साबित हो कि अपीलकर्ता पर भारी वित्तीय बोझ है। अदालत ने टिप्पणी की कि भरण-पोषण केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व भी है, जिसका उद्देश्य पत्नी और बच्चे की बुनियादी जरूरतें पूरी करना है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट के पारित आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है। परिणामस्वरूप, अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश यथावत रखा गया।
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