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वार्ता फेल, बैठक छोड़ बाहर चले गए HRTC के कर्मचारी नेता

Wed, 15 Jun 2016 10:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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कर्मचारी नेताओं ने अल्टीमेटम दिया कि मांगें न मानीं तो हड़ताल आगे खिसक सकती है। - फोटो : अमर उजाला
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एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति की परिवहन सचिव और एमडी के साथ हुई बैठक बेनतीजा रही। मंगलवार दोपहर बाद 3 बजे एमडी ने स्वयं समिति के पदाधिकारियों को बैठक के लिए बुलाया और हड़ताल वापस लेने की हामी भरी। कर्मचारियों ने पहले अपनी मांग पूरी करने के बाद हड़ताल वापस करने की बात कही।
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परिवहन सचिव और एमडी की मांगों पर असमर्थता जताने के बाद कर्मचारियों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। मौके पर ही कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दे डाली। कर्मचारी दो मुख्य मांगों पर अडे़ रहे। पहले परिवहन निगम को रोडवेज बनाने और सरकारी खजाने से कर्मचारियों के लिए बजट का प्रावधान, दूसरी अन्य विभागों की तर्ज पर निगम कर्मचारियों को भी सामन वेतन देना शामिल है।

परिवहन सचिव ने कहा कि वह अपने स्तर पर मांगों को पूरा नहीं कर सकते। जहां तक चालक-परिचालक अनुबंध कर्मचारियों की मांग है, इस मामले को पहले बीओडी की बैठक में लाया जाएगा। उसके बाद ही कुछ निर्णय लिया जा सकता है। रोडवेज की मांग पर सरकार ही फैसला ले सकती है।
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सचिवालय नहीं, इधर आकर करें अधिकारी बात

शिमला के ओल्‍ड बस स्टैंड पर प्रदर्शन करते कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला
कर्मचारियों के जोश के आगे सरकार और निगम प्रबंधन बौना साबित रहा। परिवहन सचिव ने कर्मचारियों को बैठक करने के लिए सचिवालय बुलाया, कर्मचारियों के न जाने के बाद परिवहन सचिव खुद बात करने ओल्ड बस अड्डे पहुंचे।

करसोग बस में कर्मचारियों की बैठक
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने करसोग बस में अपनी बैठक की। बस के भीतर ही अधिकारियों के साथ बैठक के लिए एजेंडा तैयार किया गया।

श्मशानघाट में फूंका बाली का पुतला
रामरपुर में एचआरटीसी कर्मचारियों ने श्मशानघाट में परिवहन मंत्री जीएस बाली का पुतला फूंका और निगम प्रबंधन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

एचआरटीसी को पौने दो करोड़ का नुकसान
मंगलवार को परिवहन निगम की बसें न चलने पर एचआरटीसी को पौने दो करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। परिवहन निगम की 2800 बसें प्रतिदिन करीब 2200 रूटों पर दौड़ती हैं। ऐसे में निगम को प्रतिदिन पौने दो या दो करोड़ रुपये के आसपास कमाई होती है।

नहीं हुई आन लाइन बुकिंग

शिमला के ओल्‍ड बस स्टैंड पर प्रदर्शन करते कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला
एचआरटीसी कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से आन लाइन बुकिंग ठप रही। हिमाचल से बाहर जाने वाले लोगों को टैक्सी करके जाना पड़ा। कार्यालय में बुकिंग के लिए फोन की घंटिया बजती रही, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।

आगे कुंआ, पीछे खाई
एचआरटीसी तकनीकी कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि एचआरटीसी कर्मचारियों के लिए आगे कुंआ, पीछे खाई है। एक तरह एमडी ने कर्मचारियों को तंग करके रखा है, दूसरे हाईकोर्ट से भी कर्मचारियों को राहत नहीं मिल रही है।

लोगों से किया खेद प्रकट
एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति ने असुविधा के लिए प्रदेश की जनता से खेद प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी हड़ताल करने को मजबूर है। पांच साल से कर्मचारियों की मांगों पर गौर नहीं किया जा रहा है।  

मामला हाईकोर्ट के विचाराधीन है, संयुक्त समन्वय समिति को हड़ताल पर नहीं जाना चाहिए था। हड़ताल को लेकर परिवहन सचिव और निगम प्रबंधन को कर्मचारियों से बात करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि हड़ताल करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ निगम प्रबंधन सख्ती से पेश आएगा। -जीएस बाली, परिवहन मंत्री

प्रभावित हुए सैंकड़ों रूट

शिमला के ओल्‍ड बस स्टैंड पर खड़ी एचआरटीसी की बसें। - फोटो : अमर उजाला
हड़ताल के कारण शिमला में 900, रामपुर में 120 रूट, रोहड़ू में 122 और किन्नौर में 76 रूट प्रभावित रहे। सिरमौर में तमाम रूटों पर चलने वाली बस सेवा बंद रही। लंबे रूट पर भी एचआरअीसी बसें नहीं चल सकीं। इस वजह से यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

कांगड़ा जिले में हड़ताल से 700 रूटों पर बसें नहीं चलीं। हड़ताल के पहले दिन कुल्लू डिपो में 17 लाख रुपये का नुकसान हुआ। निगम के 215 रूट बंद रहे। इनमें से 35 लांग रूट शामिल हैं। बिलासपुर जिले में हड़ताल के कारण करीब 124 लोकल और बाहरी रूट प्रभावित हुए।

हड़ताल के कारण मंगलवार को राजधानी शिमला सहित जिले भर में एचआरटीसी बस सेवा ठप रही। सोमवार रात से ही लोकल और लांग रूट पर बस सेवाएं बंद कर दी गईं। बसें न चलने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

ये हैं मुख्य मांगें
एचआरटीसी को रोडवेज बनाया जाए
अन्य विभागों की तर्ज पर निगम के अनुबंध कर्मियों को समान वेतन मिले
पेंशन, मासिक वेतन, घोषित वित्तीय लाभों का एकमुश्त भुगतान हो
कार्यशालाओं की मरम्मत
सभी बसों का बीमा
जीपीएफ राशि जमा कराएं, पीस मील वर्करों को अनुबंध पर लाया जाए
ओवरटाइम, विशेष वेतन वृद्धि का लाभ तुरंत दिया जाए
करुणामूलक आधार पर तैनाती जल्द की जाए
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन हर महीने जारी की जाए

सरकार के खिलाफ गरजे निगम के कर्मचारी

शिमला के ओल्‍ड बस स्टैंड पर प्राइवेट बस के लिए उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
एचआरटीसी के करीब 11 हजार कर्मचारियों ने सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। जगह-जगह परिवहन मंत्री और एमडी के पुतले फूंके गए।

निगम की माली हालत के लिए मंत्री, परिवहन सचिव और निगम प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। संयुक्त समन्वय समिति ने पुराना बस अड्डा शिमला में नारेबाजी की।

जिला कार्यकारिणी ने हेडक्वार्टर के बाहर गेट मीटिंग कर प्रदर्शन किया। शिमला में कर्मचारियों को संबोधित करते पवन गुलेरिया ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से सरकार और निगम प्रबंधन से रोडवेज बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक आश्वासन ही मिला है।

कर्मचारियों ने करीब पंद्रह दिन पहले प्रबंधन को हड़ताल को लेकर नोटिस दिया था। बावजूद इसके मांगों पर गौर नहीं किया गया। उन्होंने एमडी से इस्तीफे की मांग की।

मांगें पूरी नहीं की तो मंत्री पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं

शिमला के ओल्‍ड बस स्टैंड पर बस के इंतजार में खड़े यात्री। - फोटो : अमर उजाला
कहा कि जब से निगम के एमडी पद पर आईपीएस अफसर की तैनाती की गई है, तब से न तो परिवहन सेवाएं दुरुस्त हैं, न ही कर्मचारियों की मांगों पर गौर किया जा रहा है। कहा कि मंत्री आश्वासन ही देते हैं, लेकिन मांगें पूरी नहीं की जातीं। अगर कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं की जा सकतीं तो उन्हें मंत्री पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है।

कर्मचारी नेता शंकर सिंह ने कहा कि मंत्री जीएस बाली के हाथ में परिवहन सेवाएं देने से परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार कर्मचारियों की मांगें नहीं मानती है तो कर्मचारियों का आंदोलन जारी रहेगा। एचआरटीसी तकनीकी कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि निगम में अनुबंध पर तैनात चालकों-परिचालकों को 7000 और 4000 रुपये

मासिक वेतन दिया जा रहा है, जबकि अन्य विभागों में पे बैंड और प्लस ग्रेड पे दिया जा रहा है। आज अनुबंध कर्मचारी 83 सौ रुपये वेतन ले रहा है। सर्व कर्मचारी महासंघ ने महासचिव खमेंद्र गुप्ता ने भी संबोधित किया। धर्मशाला, रामपुर, सोलन, हमीरपुर और ऊना में भी धरना प्रदर्शन के अलावा एमडी और परिवहन मंत्री के पुतले फूंके गए।
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नहीं ली कोर्ट के आदेशों की कॉपी

पदाधिकारियों ने आदेशों की कॉपी लेने से मना कर दिया और सरकार व निगम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बाहर चले गए। - फोटो : अमर उजाला
एचआरटीसी ने प्रेस बयान जारी करते हुए बताया कि मंगलवार को दोपहर बाद तीन बजे जेसीसी के 30 पदाधिकारियों के साथ प्रधान सचिव (परिवहन) और निगम के प्रबंध निदेशक अशोक तिवारी की मौजूदगी में मीटिंग की गई। इस दौरान कर्मचारियों की तीन मांगों पर विचार किया गया और उन्हें कोर्ट के आदेशों की कॉपी लेने को कहा गया।

लेकिन पदाधिकारियों ने आदेशों की कॉपी लेने से मना कर दिया और सरकार व निगम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बाहर चले गए। जेसीसी के पदाधिकारियों में पवन गुलेरिया, यशपाल सुल्तानपुरी, नीलकमल गुप्ता, पृथ्वी राज कैथ, और ब्रिज लाल शर्मा शामिल थे।

निगम के प्रबंध निदेशक अशोक तिवारी ने बताया कि हाइकोर्ट के आदेशानुसार क्षेत्रीय प्रबंधक (लीगल) एमके शर्मा के जरिए पवन गुलेरिया, यशपाल सुल्तानपुरी, नीलकमल गुप्ता, पृथ्वी राज कैथ, ब्रिज लाल शर्मा और हरदयान सिंह को कोर्ट के आदेशों की कॉपी दी गई।

याथ ही इन्हें यह भी बताया गया कि हाइकोर्ट के आदेशानुसार मंगलवार शाम 5 बजे तक हड़ताल खत्म कर दें। ऐसा न करने पर हाईकार्ट अवमानना के चलते सख्त कार्रवाई होगी। जेसीसी पदाधिकारियों ने न ही कोर्ट के आदेशों की कॉपी ली और हड़ताल वापस लेने से भी मना कर दिया।
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