23 नवंबर के बाद बड़ी संख्या में शादियों के मुहूर्त के चलते एचआरटीसी परिचालक छुट्टी मांग रहे हैं लेकिन परिचालकों की भारी कमी के चलते निगम प्रबंधन के लिए छुट्टियां स्वीकृत करना मुश्किल हो रहा है। आलम यह है कि कुछ परिचालक अपनी शादी तो कुछ परिवार में शादी के लिए छुट्टी मांग रहे हैं। निगम में परिचालकों की कमी के चलते मुश्किल से काम चलाया जा रहा है। इस पर बड़ी संख्या में परिचालक अगर छुट्टी जाते हैं तो रूटों पर बसें चलाना मुश्किल हो जाएगा।
एचआरटीसी के 31 डिपो में 450 से अधिक परिचालकों के पद रिक्त चल रहे हैं। बीते कई सालों से एचआरटीसी में परिचालकों की भर्ती नहीं हुई, जबकि हर महीने परिचालक सेवानिवृत हो रहे हैं। एचआरटीसी के शिमला डिवीजन में तारादेवी, शिमला ग्रामीण, शिमला लोकल, रोहड़ू, रामपुर, करसोग, रिकांगपिओ, सोलन और परवाणु डिपो में परिचालकों की सबसे अधिक कमी चल रही है।
बाहरी जिलों से स्थानांतरण के बाद परिचालक राजनीतिक प्रभाव के चलते सेवाओं पर नहीं आ रहे, जिससे समस्या बढ़ रही है। हिमाचल प्रदेश राज्य एचआरटीसी परिचालक यूनियन के प्रांतीय प्रधान कृष्ण चंद का कहना है कि स्टाफ कम होने से परिचालकों को रेस्ट नहीं मिल रहा। ओवरटाइम कर रहे हैं तो उसका पैसा नहीं मिल रहा।
सरकार को तुरंत परिचालकों के रिक्त पद भरने चाहिए। परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के महासचिव खेमेंद्र गुप्ता का कहना है कि निगम प्रबंधन के साथ हर बैठक में चालक परिचालकों के रिक्त पद प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग उठाई गई है। चालक परिचालकों से अतिरिक्त काम लिया जा रहा है।
जनवरी में 365 परिचालक मिलने की उम्मीद
लोक सेवा आयोग को कंडक्टर भर्ती का जिम्मा सौंपा गया है। 365 पदों के लिए लिखित परीक्षा 10 दिसंबर को होनी है। जनवरी में नए साल पर निगम को कंडक्टर मिलने की उम्मीद है। यात्रियों को समस्या का सामना न करना पड़े। इसके लिए सभी रूटों के संचालन की व्यवस्था की जा रही है।
- रोहन चंद ठाकुर, प्रबंध निदेशक, एचआरटीसी