प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल पथ परिवहन निगम को आदेश दिए हैं कि वह सामान्य से कम बस किराया वसूलना तुरंत प्रभाव से बंद करे। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने निजी बस ऑपरेटरों की ओर से दायर याचिकाओं का निपटारा करते हुए उक्त आदेश दिए।
जेएनएनयूआरएम-2 के तहत आई नई बसों को प्रदेश भर में विभिन्न रूटों में दौड़ाया जा रहा है जिनमें एचआरटीसी सामान्य से 40 फीसदी तक कम किराया वसूल रहा है। निजी ऑपरेटरों ने हाई कोर्ट के समक्ष इसे चुनौती दी थी। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि वह बसों की समय सारिणी इस ढंग से तय करे कि एचआरटीसी और निजी बसों में यात्रियों का बंटवारा बराबर हो।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि केंद्र सरकार की जवाहरलाल नेहरू नेशनल अरबन रिन्यूवल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत शिमला शहर को दी गई बसों को राज्य सरकार और निगम की ओर से दूसरे स्थानों पर बिना परमिट के चलाया जा रहा है जोकि मोटर वाहन अधिनियम का सरासर उल्लंघन है। योजना के तहत शिमला शहर को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने अन्य फंड के साथ-साथ बसें देने का निर्णय लिया।
योजना के अनुसार यह बसें सिर्फ शिमला शहर में ही चलाई जानी है। लेकिन इन बसों को प्रदेश के अन्य स्थानों पर बिना परमिट के चलाया जा रहा है। इनका किराया भी सरकार ने मनमर्जी से तय किया है। प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया है कि एक ही रूट पर चलाई जा रही सामान्य बसों का किराया अलग-अलग नहीं हो सकता। जेएनएनयूआरएम के तहत शिमला शहर के लिए दी गई बसों को दूसरे स्थानों पर न चलाने की गुहार को अदालत ने ठुकरा दिया।
सस्ते किराये पर चल रहीं 176 बसें- जेएनएनयूआरएम-2 के तहत एचआरटीसी को मिलीं करीब 176 स्टैंडर्ड और मिडी बसें फिक्स किराये पर चलाई जा रही हैं। शिमला के तकरीबन सभी शहरी और ग्रामीण रूटों पर ये बसें चलाई जा रही हैं। इसके अलावा मंडी, धर्मशाला, कुल्लू, मनाली, सोलन, सिरमौर, ऊना, हमीरपुर सहित प्रदेश के तकरीबन सभी प्रमुख शहरों में सामान्य से कम किराए पर बसें चलाई जा रही है। प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों के लिए भी एचआरटीसी सस्ते किराये वाली बसें चला रहा है।
सीएम ने भी कह था- सामान्य से कम किराये वाली बसों के मामले में निजी बस ऑपरेटर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिले थे। उन्होंने भी किराया एक समान रखने को कहा था। हालांकि, बाद में मुख्यमंत्री ने सचिवालय में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा था कि किराया कम करना या बढ़ाना एचआरटीसी का काम है। इससे उनका कोई सरोकार नहीं है।