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प्राइवेट ऑपरेटरों ने बसों के रूट परमिटों में कराया अवैध संशोधन

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Hrtc employees shimla
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एचआरटीसी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने निजी ऑपरेटरों के खिलाफ खोला मोर्चा
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बोले, परमिटों में परिवहन नीति के नियमों के हुआ उल्लंघन
शिमला। शिमला सहित जिलेभर के निजी बस ऑपरेटरों ने नियमों को ताक पर रखकर रूट परमिटों में अवैध संशोधन करवाया है। सरकार की परिवहन नीति 2004 और 2014 के प्रावधानों को दरकिनार कर अनैतिक तरीके से नए रूट परमिट लिए हैं। निजी ऑपरेटरों द्वारा एचआरटीसी अधिकारियों पर उठाए सवालों पर हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। समिति के सचिव विद्यासागर शर्मा ने कहा कि सरकार पर अनुचित दबाव डालकर निजी बस ऑपरेटरों ने किरायों में बढ़ोतरी करवा जनता पर बोझ डाला है।
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष उमेश शर्मा, प्रवक्ता हरी लाल, कोषाध्यक्ष यशपाल सुल्तानपुरी, राजेंद्र ठाकुर, देसराज, खेमेंद्र गुप्ता, हितेंद्र कंवर, गोपाल लाल, देवराज ठाकुर, कांशीराम, अनिल कुमार, ऋषि कुमार, संजय बड़वाल, टेकचंद, पूर्ण चंद, दलीप कुमार और मेघराम ने कहा कि निजी ऑपरेटरों द्वारा एचआरटीसी के अधिकारियों के खिलाफ बेबुनियाद बयानबाजी बस ऑपरेटरों की हीन भावना को प्रदर्शित करती है।
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प्रदेश सरकार की परिवहन नीति के तहत रूट परमिट देने के प्रावधानों को ताक पर रखकर निजी ऑपरेटरों ने परमिट हासिल किए हैं। इसकी पुष्टि एजी हिमाचल प्रदेश ऑडिट रिपोर्ट में कर चुकें हैं। उच्च न्यायालय में इसे लेकर केस दायर है। परिवहन नीति 2004 में 60 फीसदी ग्रामीण और 40 फीसदी राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य राजमार्ग के रूट पर ही निजी ऑपरेटरों को रूट परमिट देने की व्यवस्था है, बावजूद इसके अधिकांश रूट परमिटों में इस नीति के खिलाफ संशोधन किया है।
अनावश्यक बढ़वा दिया न्यूनतम किराया
हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि न्यूनतम किराया 5 से 7 रुपये और प्रति किलोमीटर किराया 2.19 रुपये लागू करवा कर निजी ऑपरेटरों ने जनता पर अनावश्यक बोझ डाला है। आरटीओ और पुलिस विभाग के निरीक्षण में आए दिन निजी बसें बिना दस्तावेजों के पकड़ी जा रही हैं। ऑपरेटर अपने स्टाफ को न वर्दी दे रहे हैं न टिकटें। एक परमिट पर दो-दो बसें चलाई जा रही हैं। शिमला में रोजाना निजी बस ऑपरेटर टाइम टेबल को लेकर आपस में उलझते रहते हैं और सार्वजनिक स्थलों पर हाथापाई से भी गुरेज नहीं करते। समिति ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से शहर में नियमों को ताक पर रख कर बसों का संचालन कर रहे निजी बस ऑपरेटरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
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रद्द हो चुके हैं अवैध परमिट : सुनील
निजी बस ऑपरेटर यूनियन के महासचिव सुनील चौहान ने कहा कि जिन ऑपरेटरों ने अवैध परमिट लिए थे उन्हें परिवहन विभाग रद्द कर चुका है। सरकार अगर डीजल के रेट आधे कर दे तो हम आधे किराये पर चलाने को तैयार हैं। निजी ऑपरेटर सरकार को करोड़ों रुपये टैक्स चुका रहे हैं जबकि एचआरटीसी सरकारी ग्रांट से चल रही है। नियमों का पालन न करने वाले एचआरटीसी अधिकारी पर कार्रवाई होनी चाहिए। प्राइवेट बस ड्राइवर कंडक्टर यूनियन के अध्यक्ष रूपलाल ठाकुर और महासचिव अखिल गुप्ता ने कहा कि राजधानी में ज्वाइंट टाइम टेबल लागू न होने के कारण समस्या पेश आ रही है। परिवहन विभाग को तुरंत ज्वाइंट टाइम टेबल तैयार कर सख्ती से लागू करना चाहिए।
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