हिमाचल पथ परिवहन निगम की 11 यूनियनों के करीब 3000 कर्मचारियों ने वीरवार को संयुक्त समन्वय समिति के बैनर तले एचआरटीसी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया।
यूनियन पदाधिकारियों ने परिवहन निगम को रोडवेज बनाने, चालकों-परिचालकों को अनुबंध आधार पर वेतन न देने और जीपीएफ ट्रस्ट से निकाले गए कर्मचारियों के पैसे को पुन: ट्रस्ट में जमा न करवाने की मांग पर एचआरटीसी प्रबंधन और सरकार को जमकर कोसा।
चेतावनी दी कि अगर सरकार और निगम प्रबंधन ने कर्मचारियों की मांगें नहीं मानीं तो 14 और 15 जून को प्रदेश में चक्का जाम किया जाएगा। तकनीकी कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार निगम को रोडवेज नहीं बना सकती तो वह कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और अन्य वित्तीय लाभों का बजट में प्रावधान करे।
22 अप्रैल को निगम प्रबंधक ने संयुक्त समन्वय समिति की बैठक बुलाई। इसमें मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन जब जेसीसी की प्रोसीडिंग सामने आईं तो उसमें कुछ नहीं था। परिवहन मजदूर संघ के प्रदेशाध्यक्ष शंकर सिंह ठाकुर ने कहा कि निगम से मांगों को मनवाने के बाद ही दम लेंगे।
संयुक्त समन्वय समिति के प्रदेशाध्यक्ष पवन गुलेरिया ने कहा कि सरकार उन्हें वार्ता के लिए बुलाए, नहीं तो दो दिन तक चालक-परिचालक बसें नहीं चलाएंगे। सर्व कर्मचारी संगठन के महासचिव खमेंद्र गुप्ता ने बताया कि कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी हो रही है।
चालकों-परिचालकों का ओवरटाइम लंबे समय से पेंडिंग है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिल रही है। सत्यप्रकाश शर्मा, बृजलाल, महेश शर्मा, देवराज, सुभाष वर्मा, रोशन चौहान सहित दर्जनों कर्मचारी नेताओं ने रैली को संबोधित किया।