कर्मचारियों की मांग है कि परिवहन निगम को रोडवेज बनाया जाए।
- फोटो : फाइल फोटो
एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति अपनी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार और निगम प्रबंधन के साथ आर पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है। जेसीसी की बैठक में कर्मचारियों ने फैसला लिया कि 15 और 16 जून को काम छोड़ो हड़ताल के बावजूद सरकार नहीं मानती है तो इसके बाद कर्मचारी प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे।
बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष पवन गुलेरिया ने की। इसमें एचआरटीसी के 7 यूनियनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। कर्मचारी सिर्फ दो मुख्य मांगों पर अडे़ हैं। इसमें परिवहन निगम को रोडवेज बनाया जाना और दूसरी प्रदेश सरकार की तर्ज पर
एचआरटीसी में भी अनुबंध कर्मचारियों के लिए समान वेतन दिया जाना शामिल है। तकनीकी कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि 48 घंटे हिमाचल में एचआरटीसी की एक भी बस नहीं चलेगी।
कर्मचारियों की मांग है कि एचआरटीसी में भी अनुबंध कर्मचारियों के लिए समान वेतन दिया जाए।
- फोटो : फाइल फोटो
निगम के चालक सड़कों के किनारे बसें खड़ी कर देंगे। दफ्तर का स्टाफ भी सड़कों में आएगा। एचआरटीसी सर्व कर्मचारी महासंघ के महासचिव खमेंद्र गुप्ता ने बताया कि परिवहन मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक में जो मामले डिस्कस किए हैं, वे पुराने हैं।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन देना निगम प्रबंधन की जिम्मेवारी है। इसी तरह लीव इन कैशमेंट भी देय था। उन्होंने कहा कि परिवहन निगम की दो मुख्य मांगें हैं। अगर प्रदेश सरकार इन दोनों मांगों पर अपनी सहमति देती है तो एचआरटीसी संयुक्त समन्वय समिति अपना आंदोलन वापस ले लेगी।
आंदोलन वापस लेने को लिखा था पत्र
परिवहन मंत्री जीएस बाली ने एचआरटीसी कर्मचारियों को आंदोलन वापस लेने के लिए यूनियन पदाधिकारियों को पत्र लिखा था, इसमें यूनियन को आंदोलन न किए जाने की बात कही गई थी। यह नहीं सरकार ने तीन साल में जो भी कर्मचारियों को वित्तीय लाभ दिए थे, उसका ब्योरा इस पत्र में दिया गया था।