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हिमाचल: अगले 5 वर्षों में HRTC को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य, 1000 ई-बसें और 200 हाइड्रोजन बसें खरीदेगी सरकार

Mon, 17 Aug 2026 01:20 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

हिमाचल में हरित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए मंडी में 25 नई एचआरटीसी इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू की गईं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार अगले पांच वर्षों में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। आने वाले समय में 1000 इलेक्ट्रिक और 200 हाइड्रोजन बसें खरीदने की योजना है। इलेक्ट्रिक बसों से संचालन लागत में भी बचत हो रही है।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में हरित और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एचआरटीसी के इलेक्ट्रिक बस बेड़े के विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से मंडी के पड्डल मैदान से जिले के लिए 25 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का शुभारंभ किया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एचआरटीसी के इलेक्ट्रिक बस बेड़े को मजबूत करने के लिए 297 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी हैं। इन बसों का संचालन शिमला, नाहन, नालागढ़, ऊना, हरोली, बिलासपुर, देहरा, हमीरपुर, पालमपुर, धर्मशाला और नगरोटा सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है।



उन्होंने कहा कि कुल्लू, मंडी और सुंदरनगर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग ढांचा भी तैयार किया जा चुका है। इन क्षेत्रों में नई इलेक्ट्रिक बस सेवाओं का संचालन शुरू होने से सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।

एक चार्ज में 180 किलोमीटर की निर्धारित रेंज
मुख्यमंत्री ने बताया कि टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों की निर्धारित ड्राइविंग रेंज 80 प्रतिशत स्टेट ऑफ चार्ज पर करीब 180 किलोमीटर है। उन्होंने कहा कि परिचालन के दौरान इन बसों का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है। शिमला-चंडीगढ़ मार्ग पर एक बार चार्ज करने के बाद इलेक्ट्रिक बस करीब 270 किलोमीटर की दूरी तय कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के कठिन पहाड़ी भू-भाग में लंबी दूरी के अंतर-शहरी मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों का यह प्रदर्शन इनके उपयोग की संभावनाओं को दर्शाता है।

डीजल बसों की तुलना में संचालन खर्च कम
सुक्खू ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से एचआरटीसी की परिचालन लागत में भी कमी आ रही है। डीजल बसों की तुलना में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में ऊर्जा लागत पर करीब 12 से 13 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है। इससे निगम के ईंधन और परिचालन खर्च को कम करने के साथ सार्वजनिक परिवहन की दक्षता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार कार्बन उत्सर्जन कम करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार और सरकारी सहयोग से एचआरटीसी को आधुनिक, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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पांच साल में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार एचआरटीसी को बसें खरीदकर उपलब्ध करवाती है और हर वर्ष करीब 840 करोड़ रुपये का अनुदान देती है। उन्होंने दावा किया कि निगम अपने संसाधनों से भी लगभग इतनी ही राशि अर्जित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एचआरटीसी को आत्मनिर्भर बनाना है। आने वाले समय में प्रदेश में 1000 इलेक्ट्रिक बसें और 200 हाइड्रोजन बसें खरीदी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपने पहले बजट में 'ग्रीन हिमाचल' की परिकल्पना रखी थी और इलेक्ट्रिक बसों का संचालन इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा और एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक शिवम प्रताप सिंह शिमला में मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। मंडी में वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, एपीएमसी अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशि शर्मा, जिला कांग्रेस कमेटी मंडी अध्यक्ष चंपा ठाकुर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
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