एचपीयू के कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार ने कहा कि हिमाचल जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य के दूरदराज क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं के लिए इक्डोल किसी वरदान से कम नहीं है। घर बैठे उच्च शिक्षा प्रदान करने में इक्डोल का 1995 से लेकर अहम योगदान रहा है। इस संस्थान को बचाने और भविष्य में इसे और बेहतर करने के लिए विवि प्रशासन कृतसंकल्प है।
मान्यता दिलाने में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पूरा सहयोग किया। कहा कि यूजीसी डेब के तहत तय शर्तों और छात्रों को सुविधाएं मुहैया करवाने को काम किया जा रहा है।
इक्डोल को मान्यता मिलने से प्रदेश के पत्राचार तथा दूरवर्ती शिक्षा मोड से यूजी, पीजी कोर्स और डिप्लोमा कोर्स करने वाले करीब 40 से 50 हजार विद्यार्थियों को राहत मिली है। उन्होंने शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, यूजीसी के अध्यक्ष प्रो. डीपी सिंह का इक्डोल की मान्यता को बहाल करने पर आभार जताया।
कहा कि 1971 में अस्तित्व में आए विवि ने दूरवर्ती एवं जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले हजारों विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा घर-द्वार पर देने के उद्देश्य से दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय विश्वविद्यालय में स्थापित किया गया। वर्ष 1995 में इसी दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पायदान तक पहुंचाने को अंतर्राष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा एवं मुक्त अध्ययन केंद्र (इक्डोल) किया गया।
1971 से 1985 के समय में विवि ने भारतवर्ष विशेष रूप से उत्तरी क्षेत्र में एमएड की कक्षाएं चलाकर एक नया मुकाम हासिल। इक्डोल में एमबीए, बीसीए, एमसीए, पीजीडीसीए, टूरिज्म एंड ट्रेवल मैनेजमेंट जैसे कई रोजगारोन्मुख कोर्स शुरू किए गए हैं।