सैकड़ों विद्यार्थियों को ओवरलोड बसों में करना पड़ा सफर, पुरानी हो चुकी 5 बसें नहीं चला रहा विवि
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छात्र संगठनों ने उठाई राहत दिलाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में नियमित कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं लेकिन परिवहन व्यवस्था पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है। अभी 8 बसों में से केवल 3 ही बसें चल रही हैं। इस कारण छात्रों को ओवरलोड निजी बसों में सफर करना पड़ रहा है।
शेष 5 बसें पुरानी होने और फिटनेस मानकों पर खरा न उतरने के कारण सड़कों पर नहीं उतारी जा सकती। इससे सैकड़ों विद्यार्थियों को रोजाना आवागमन में कठिनाई झेलनी पड़ रही है। बंद पड़ी बसों की आयु निर्धारित सेवा अवधि पार कर चुकी है। तकनीकी निरीक्षण में कई कमियां सामने आईं जिसके बाद उन्हें संचालन के लिए अनुपयुक्त माना गया। फिटनेस प्रमाणन और मरम्मत पर होने वाला खर्च अधिक होने के कारण फिलहाल उन्हें चलाने का निर्णय नहीं लिया है। नई बसों की खरीद का प्रस्ताव लंबित है और बजट स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है।
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सुबह और दोपहर के समय बस स्टॉप पर भारी भीड़ उमड़ रही है। सीमित बसों में क्षमता से अधिक यात्री सवार हो रहे हैं। कई छात्र बस में जगह न मिलने के कारण निजी वाहनों या टैक्सी का सहारा लेने को मजबूर हैं।दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए स्थिति और गंभीर हो गई है। अतिरिक्त खर्च और देरी के कारण उनकी नियमित उपस्थिति प्रभावित हो रही है। परिवहन व्यवस्था की कमी का सीधा असर शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। कई विद्यार्थी समय पर कक्षाओं और प्रैक्टिकल सत्रों में नहीं पहुंच पा रहे हैं। उपस्थिति आधारित पाठ्यक्रमों में यह समस्या और अधिक चुनौतीपूर्ण बन गई है।
छात्रों ने मांग की है कि नई बसों की खरीद प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए या अस्थायी रूप से वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था की जाए। वहीं कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी ने बताया कि बसों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही छात्रों को सुविधा मिलेगी।
एसएफआई परिसर उपाध्यक्ष आशीष ने बताया कि विश्वविद्यालय खुल चुका है लेकिन 3 बसों के सहारे पूरी परिवहन व्यवस्था चलाना अपर्याप्त साबित हो रहा है। जब तक शेष 5 बसों के स्थान पर नई व्यवस्था नहीं होती, तब तक छात्रों की परेशानी कम होती नजर नहीं आ रही। एबीवीपी के अनिल ठाकुर ने बताया कि सीमित बसों में क्षमता से अधिक यात्री सवार हो रहे हैं। कई छात्र बस में जगह न मिलने के कारण निजी वाहनों या टैक्सी का सहारा लेने को मजबूर हैं।