समारोह, आयोजनों और सेमिनार में सजावट के लिए अब केवल प्राकृतिक स्रोतों से तैयार उत्पादों का होगा उपयोग
विज्ञापन
थर्मोकोल और प्लास्टिक सजावट सामग्री नहीं होगी इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला ने अपने परिसर में आयोजित सभी समारोहों, आयोजनों, सेमीनार और शैक्षणिक कार्यक्रमों में गैर-जैविक उत्पादों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब सजावट, आयोजनों और संबंधित गतिविधियों में केवल प्राकृतिक स्रोतों से निर्मित, जैविक और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का ही उपयोग किया जाएगा।
यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दृष्टि से उठाया है। हिमाचल प्रदेश सरकार की पर्यावरण नीति और सतत विकास की दिशा में दीर्घकालिक दायित्वों को ध्यान में रखते हुए यह नीति बनाई गई है। राज्य सरकार भी गैर-जैविक, नॉन-बायोडिग्रेडेबल उत्पादों के उपयोग को कम करने के लिए कई प्रतिबंध लागू कर रही है। इसमें 500 मिली पीईटी बोतलों पर सरकारी कार्यक्रमों में प्रयोग पर प्रतिबंध रहेगा। एचपीयू प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस नई नीति के तहत थर्मोकोल, प्लास्टिक सजावट सामग्री, सिंगल-यूज गैर-बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग तथा अन्य मिलाजुला उत्पादों पर पूर्ण रोक रहेगी।
सभी छात्र संगठन, विभागों और आयोजक समितियों को निर्देश दिए हैं कि वह आगामी कार्यक्रमों के लिए सजावट सामग्री के रूप में जैविक फाइबर, कागज, बांस, फूल, पत्तियों तथा अन्य प्राकृतिक विकल्पों का ही उपयोग करें। विश्वविद्यालय के एक कुलपति महावीर सिंह ने बताया कि इस निर्णय का उद्देश्य न केवल परिसर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाना है बल्कि विद्यार्थियों को पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार और जिम्मेदार नागरिकता की सीख देना भी है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में कुछ विभागों और आयोजकों को समस्या का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन दीर्घकालिक लाभ पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए सकारात्मक होंगे।