हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने मनोनयन से केंद्रीय छात्र संघ यानी एससीए गठित करने का फैसला ले लिया है। विवि प्रशासन ने मेरिट आधार पर एससीए को छात्र प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया की रूपरेखा और इसका शेड्यूल जारी कर दिया है।
एससीए गठन की प्रक्रिया 15 से 24 सितंबर तक पूरी की जाएगी। नई प्रक्रिया के तहत विश्वविद्यालय और संबद्ध करीब 111 कॉलेजों में छात्र संघ का गठन मनोनयन के जरिये होगा।
छात्रसंघ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव तथा सह-सचिव पदों के लिए एकेडमिक मेरिट ही चयन का आधार होगी। कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी की मंजूरी के बाद इस बारे में कुलसचिव की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है।
छात्र राजनीति में उतरेंगे पढ़ाकू नेता
प्रदेश विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध कॉलेजों में अब अव्वल रहने वाले छात्र नेता बनेंगे, उन्हीं में से कॉलेज प्रशासन मेरिट में आने वाले छात्रों को एससीए का पदाधिकारी और सदस्य बनाएगा।
इससे किताबों में खोए रहने वाले और खेल, सांस्कृतिक जैसी गतिविधियों में व्यस्त रहने वाले छात्र ही आम छात्र का प्रतिनिधित्व करेंगे। इससे अप्रत्यक्ष रूप से ये छात्र राजनीति में प्रवेश कर जाएंगे।
मनोनयन से एससीए गठन के विश्वविद्यालय प्रशासन और कार्यकारी परिषद के फैसले के मुताबिक अपने प्रतिनिधि चुनने में अब आम छात्र का कोई रोल नहीं होगा। कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन ही मेरिट तैयार कर मनोनयन की प्रक्रिया पूरी कर सूची जारी करेगा। मनोनयन की इस प्रक्रिया से अब इन शिक्षण संस्थानों में छात्र संगठन की भी कोई भूमिका नहीं रहेगी।
संख्या बल पर बनेंगे सीआर, डीआर
मंजूर किए गए प्रारूप में कक्षा और विभाग प्रतिनिधि छात्र संख्या के आधार पर ही बनाए जाएंगे। इसमें संख्या अधिक होने पर दो या दो अधिक विभाग प्रतिनिधि व कक्षा प्रतिनिधि भी चुने जा सकते है। एमफिल, पीएचडी छात्रों को भी इसमें प्रतिनिधित्व भी होगा।
प्रक्रिया में डीआर और सीआर में से अकादमिक मेरिट में जो भी अव्वल होगा। उन में से ही मुख्य पदों पर मनोनयन होगा। विवि और कॉलेजों की एससीए के चार मुख्य पदों के लिए अकादमिक मेरिट में टॉप में रहने वाले छात्र ही पात्र होंगे।
उनकी पिछली परीक्षा के परिणाम के आधार पर ही मनोनयन होगा। तीसरे और पांचवें सत्र के छात्र को एससीए के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद पर मनोनित किया जाएगा। जबकि अन्य दो महासचिव और सह सचिव पद पर पहले सत्र के छात्रों में से छात्र मनोनित किया जाएगा। इससे जाहिर है कि एससीए गठन अब सिर्फ और सिर्फ संस्थान प्रशासन की ही जिम्मेदारी है।
छात्र संगठनों ने किया विरोध
हालांकि, एसएफआई और एबीवीपी जैसे छात्र संगठनों ने इसका जबरदस्त विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि वह इस चुनाव का बहिष्कार करेंगे। एसएफआई प्रदेश सह सचिव पुनीत धांटा का कहना है कि मनोनयन से चुनाव नहीं होने दिए जाएंगे। मनोनयन से चुनावों के लिए एसएफआई के जो छात्र पात्र होंगे, वो चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे।
वहीं, एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री नवनीत कौशल का कहना है कि चुनाव का एबीवीपी बहिष्कार करेगी। मनोनयन से छात्र संघ चुनाव छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार का हनन है। विश्वविद्यालय के इस निर्णय को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव अरविंद धीमान ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव न करवाने का फैसला कर छात्रों से उनका हक छीना है।