झंडूता में राज्य स्तरीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव राजपाल ठाकुर ने कहा कि शिक्षा विभाग में 15 सालों बाद कर्मचारी नियमित हुए हैं, उनमें से कई एक साल बाद ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इससे उन्हें नियमित होने का लाभ नहीं मिलेगा।
साथ ही शिक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष की जाए। वर्ष 10 मई 2001 से पूर्व नियुक्त वाली शर्त को हटाया जाए। शिक्षा विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को 5 वर्ष के बजाय 3 वर्ष में प्रयोगशाला परिसर में लिपिक बनाया जाए।
शिक्षा विभाग में 15 मई 2003 से पूर्व नियमित हुए सभी अंशकालिक और दैनिक वेतन भोगी कर्मियों को नियमित होने के बाद अन्य पूर्व कर्मचारियों की तरह उनकी तर्ज पर पुरानी पेंशन का लाभ देने, करुणामूलक आधार पर चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के आश्रितों को अर्जित योग्यता अनुसार नौकरी देने की
संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है। संघ ने कहा कि अगर 58 से 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति शिक्षा विभाग में की गई तो 2019 के चुनाव में पूरे प्रदेश के शिक्षा विभाग के कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलेंगे।