ठेकेदार आउट सोर्स कर्मचारियों को करोड़ों रूपये का ईपीएफ डकार चुके हैं। इसको लेकर भी सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है। कायदे से इसकी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमों के तहत वेतन नहीं मिल रहा है।
आउटसोर्स कर्मचारी को मिलने वाले वेतन का हिस्सा ठेकेेदार निगल जाते हैं। उन्होंने कहा कि अफसरशाही बिजली बोर्ड का निजीकरण करने में तुली है। सरकार में कभी एक ही मुख्य सचिव हुआ करता है।
मगर आज अफसरशाही बचाने के लिए आठ मुख्य सचिव सरकार में सेवाएं दे रहे हैं। यही अफसर बोर्ड के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के स्थान पर नई भर्ती करने के खिलाफ कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि बोर्ड में पहले से ही कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है।
जबकि असलियत में बोर्ड में कर्मचारियों की काफी कमी चल रही है। ठेकेदार के जरिये रखे जाने वाले आउट सोर्स कर्मचारियों से लाइन रिपेयर सहित अन्य कार्य करवाए जा रहे हैं। इसकी वजह से कई हादसे देखने को मिल रहे हैं।
इसमें कई युवा अपनी जान भी गंवा चुके हैं। इस मौके पर सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जितेंद्र ठाकुर, चीफ आर्गनाइजर सेक्रेटरी मनोज सूद समेत जिला अध्यक्ष अनिल वर्मा और अन्य मौजूद रहे।