एचपीसीए प्रवक्ता संजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर वीरभद्र सिंह की ओर से किए गए गलत कार्यों को दुरुस्त कर रहे हैं। खेल संघों का गला घोंटने के लिए तत्कालीन वीरभद्र सरकार की ओर से पारित किए गए खेल विधेयक को वापस लेकर जयराम सरकार ने खिलाड़ियों और खेल के हित में फैसला लिया है।
एचपीसीए इसके लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और खेल मंत्री गोविंद ठाकुर का आभार व्यक्त करता है। तत्कालीन सीएम वीरभद्र सिंह ने एचपीसीए को कब्जाने की मंशा से विपक्ष के विरोध के बावजूद खेल विधेयक को पारित करवाया था।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह वर्ष 2002 से एचपीसीए को कब्जाने की कोशिश कर रहे थे। वह खुद और अपने बेटे को एचपीसीए का अध्यक्ष बनाना चाहते थे। वर्ष 2005 में वीरभद्र सिंह ने एचपीसीए के समानांतर क्रिकेट संघ खड़ा करवा दिया।
प्रशासन को जबरन स्टेडियम में घुसाकर कब्जा करने की नाकाम कोशिश करवाई। एचपीसीए को कब्जाने के लिए वर्ष 2005-06 में खेल विधेयक पारित करवा दिया जिसे भाजपा कार्यकाल में निरस्त किया गया।
इन सब चुनौतियों के बावजूद एचपीसीए ने अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर की उन्नति हासिल की। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और खेल मंत्री गोविंद ठाकुर ठोस खेल नीति बनाएं। सभी खेलों पर ठोस कोड ऑफ कंडक्ट लागू होना चाहिए। खिलाड़ियों के चयन में पारदर्शिता होनी चाहिए।
धर्मशाला में आईपीएल सिर्फ पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के हठ की वजह से नहीं हो पाया। वीरभद्र सिंह ने फ्रेंचाइजी से अच्छा व्यवहार नहीं किया। भविष्य में धर्मशाला में आईपीएल मैच जरूर होंगे।