विधायक डॉ. जनक राज ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि चंबा जिले में 165 बीघा जमीन देने की योजना है, जबकि खनन नीति के अनुसार 5 बीघा से अधिक सरकारी जमीन बिना नीलामी के नहीं दी जा सकती, लेकिन यह जमीन बिना नीलामी के लीज पर दी जा रही है। इस पर उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यह मामला वर्ष 2015 का है। इस लीज के लिए वर्ष 2015 में आवेदन आया था और पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 2016 में एलओआई जारी किया गया और फिर इसमें आगे कार्य हुआ।
2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद इस लीज को अस्थाई तौर पर रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार 2018 के बाद कोई सरकारी जमीन माइनिंग के लिए लीज पर नहीं, बल्कि नीलामी के माध्यम से ही दे रही है। वर्ष 2021 में भारत सरकार ने वन मंजूरी से संबंधित एनओसी दी। 58 लाख रुपये से अधिक इसके लिए जमा करवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला कैबिनेट में भी आया था और फिर विधि और उद्योग विभाग से क्लीयरेंस के बाद मंजूर किया गया।
उद्योग मंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 के बाद पांच बीघा से अधिक जमीन खनन के लिए लीज पर नहीं दी जा सकती। यह मामला वर्ष 2018 से पहले का था। ऐसे में इसे मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा कि 2016 से 2019 तक 322 खनन पट्टे दिए गए। इनमें से अभी तक दो मामलों में ही एफसीए मिला है। सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती, जिससे कोर्ट में उनकी किरकिरी हो।