हिमाचल प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा करने वाले कांग्रेस के अयोग्य घोषित छह विधायक सुधीर शर्मा, राजेंद्र राणा, देवेंद्र भुट्टो, रवि ठाकुर, इंद्रदत्त लखनपाल, चैतन्य शर्मा और तीन निर्दलीय विधायक केएल ठाकुर, होशियार सिंह और आशीष शर्मा बुधवार दोपहर को ऋषिकेश से दिल्ली पहुंचे। आठ मार्च को यह सभी नेता चंडीगढ़ से उत्तराखंड के ऋषिकेश पहुंच थे। 27 फरवरी को राज्यसभा चुनाव में क्राॅस वोटिंग करने के बाद से सभी नेता शिमला से पंचकूला चले गए थे। बजट सत्र के लिए सीआरपीएफ की सुरक्षा में 28 फरवरी को विधानसभा शिमला आने के बाद दोबारा पंचकूला लौट गए थे। 28 फरवरी के बाद से ये हिमाचल नहीं लौटे हैं।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने बजट पारित होने के दौरान मौजूद नहीं रहने पर कांग्रेस के छह विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया है। अध्यक्ष के इस फैसले के खिलाफ इन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया है। 18 मार्च को बागियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस के साथ भाजपा की भी नजर है। सूत्रों ने बताया कि दोनों दलों ने विकल्प को लेकर अपनी योजनाएं तैयार रखी हैं। विधायकों को अयोग्य घोषित करने के फैसले पर रोक लगने या विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर मोहर लगने के बाद किस प्रकार से आगामी कदम उठाए जाएंगे, इसकाे लेकर भाजपा और कांग्रेस ने भी रणनीति तैयार कर ली है।