पूर्व शिक्षा मंत्री राधा रमण शास्त्री ।
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पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं शांता सरकार में शिक्षा मंत्री रहे राधारमण शास्त्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश की बिगड़ी स्थिति पर एक वक्तव्य दिया है। सरकार में इतनी घबराहट भी नहीं होनी चाहिए थी कि हिमाचल प्रदेश की तुलना श्रीलंका की आर्थिक स्थिति से की जाए। उनका यह मानना है कि हर प्रदेश कहीं न कहीं इस समस्या से जूझा रहा है। हिमाचल ही नहीं, उत्तराखंड, त्रिपुरा, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय आदि जो भी हिमालय के साथ लगने वाले क्षेत्र हैं। उनकी आर्थिक स्थिति कभी भी ऐसी नहीं हो सकती है कि वे अपने कदमों पर खड़े हो जाएं। उसके लिए प्रयास किए जा सकते हैं।
सोमवार को शास्त्री ने एक बयान जारी कर कहा कि उदाहरण के लिए वह पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का नाम लेते हैं, जिन्होंने अपने समय मेें विषम आर्थिक परिस्थिति से जूझते हुए अच्छे तरीके से सरकार को चलाया। कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनको बहुत ज्यादा सार्वजनिक न करते हुए बहुत हौसले और हिम्मत के साथ आगे बढऩा चाहिए। चीजें बदलती रहती हैं। हिमाचल प्रदेश की अच्छी बात यह है कि यहां दल-बदल या चुनी हुई सरकारों को तोडऩे का चलन नहीं है। यहां का मतदाता बहुत ज्यादा बुद्घिमान हैं, वे मतदान भी करते हैं और बारीकी से परिस्थितियों को भी समझते हैं।