पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह आदेश पूरे हिमाचल प्रदेश में प्रभावी होगा। हालांकि लाहौल-स्पीति जिला (केलांग सब-डिवीजन, जिला लाहौल-स्पीति की जिला परिषद), चंबा जिला के पांगी सब-डिवीजन की पंचायत समितियों और कुल्लू जिले की चार ग्राम पंचायतों को इससे बाहर रखा गया है। इन क्षेत्रों के अलावा अन्य सभी संस्थाएं 31 जनवरी 2026 को अपना कार्यकाल पूरा होने पर भंग मानी जाएंगी। सेंट्रल फाइनेंस कमीशन ग्रांट (सीएफसी) के तहत भुगतान प्रक्रिया के लिए सदस्य सचिव मेकर होंगे और समिति के अध्यक्ष चेकर की भूमिका में रहेंगे। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक नई पंचायतों का विधिवत पुनर्गठन नहीं हो जाता।
राज्य निर्वाचन आयोग को रोस्टर का इंतजार
हिमाचल पंचायत चुनाव का मामले भले ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया हो, लेकिन मामले में सुनवाई न होने पर राज्य निर्वाचन आयोग और प्रदेश सरकार ने अपनी तैयारियां जारी रखी हैं। 11 फरवरी से मतदाता सूचियों के प्रिंटिंग का काम शुरू होगा। पांच दिन के भीतर काम पूरा कर सूचियों को बीडीओ और पंचायत कार्यालय में पहुंचा दी जाएगी। पंचायत कार्यालय के बाहर इन सूचियों को चस्पा किया जाना है। जिन लोगों के मतदाता सूची में नाम नहीं होगा वह दो रुपये देकर अपना वोट बना सकेंगे। जब तक मामले में सुनवाई नहीं होगी, तब तक राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के लिए हाईकोर्ट का फैसला ही मान्य रहेगा। हिमाचल में 3577 पंचायतें हैं। इनका कार्यकाल पूरा हो चुका है। 1 फरवरी से पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्तियां कर दी गई हैं। पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों और नई कार्यों की अनुमति प्रशासक ही देंगे। इसके अलावा विकास कार्यों की देखरेख भी प्रशासकों की ओर से की जा रही है। हिमाचल में 31 पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन किए जाने से पंचायतों की संख्या में भी बढ़ोतरी की जानी है। जिला उपायुक्तों की ओर से फाइल सरकार को भेज दी गई है।