प्रदेश हाईकोर्ट ने बद्दी में कॉमन एफफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता से कम दोहन किए जाने के मामले में संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में स्टेट्स रिपोर्ट तलब की है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किए। मामले के अनुसार सोलन जिला के बद्दी में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी का सही से उपचार न होने के कारण बद्दी क्षेत्र में प्रदूषण की मात्रा लगातार बढ़ रही है।
करीब 60 करोड़ की लागत से इस क्षेत्र में कॉमन एफफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया है। इसकी प्रस्तावित क्षमता 250 लाख लीटर प्रतिदिन गंदे पानी का उपचार करने की है, जबकि इसमें 110 लाख लीटर प्रतिदिन गंदे पानी का ही उपचार किया जा रहा है।
ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता से कम दोहन किये जाने की बात तब सामने आई जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने यह बात जिला परिषद की त्रैमासिक बैठक में बताई। सोलन जिला परिषद अध्यक्ष धर्मपाल चौहान ने बोर्ड के अधिकारियों से मीटिंग के दौरान पूछा था कि बद्दी बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में कितने कचरा उपचार केंद्र खोले गए हैं और क्या वे क्षमता के अनुरूप कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या बोर्ड ने कभी ट्रक ऑपरेटर यूनियन के पास सरसा नदी से पानी के सैंपल जांच के लिए भरे। यदि सैंपल भरे और सैंपल फेल पाए गए तो बोर्ड ने नजदीकी औद्योगिक इकाइयों पर क्या कार्यवाई अमल में लाई। उन्होंने यह आरोप लगाया है कि क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोत औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गदे पानी से प्रदूषित हो रहे हैं जिससे लोग बीमार हो रहे हैं।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधीश सोलन और बीबीएन डेवलपमेंट अॅथारिटी के सीईओ से भी 2 सप्ताह के भीतर स्टेट्स रिपोर्ट तलब की है। मामले पर सुनवाई 3 अगस्त को होगी।