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पालकी में बिठाकर अस्पताल पहुंचाएगी एंबुलेंस

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हिमाचल प्रदेश में अब एक अनोखी एंबुलेंस सेवा शुरू की जा रही है। जिन क्षेत्रों में सड़क सुविधा नहीं है, वहां ‘पालकी’ एंबुलेंस चलाई जाएगी। इसमें रोगियों को सड़क तक पालकी में लाया जाएगा।
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सड़क से 108 एंबुलेंस के जरिये मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचाया जाएगा। पहले चरण में 160 पालकियां खरीदी जाएंगी। टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ये पालकियां सभी जिलों को दी जाएंगी।

हिमाचल सरकार गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मदद से यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रही है। शुरू में 160 पालकियां खरीद कर 108 एंबुलेंस से अटैच की जाएंगी।
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108 की तर्ज पर शुरू होगी सेवा

पालकी का जिम्मा पंचायत पर होगा। स्वास्थ्य कर्मी की देखरेख में स्थानीय लोगों की मदद ली जाएगी। इसका मेहनताना भी दिया जाएगा। पालकी के भीतर इलाज की प्राथमिक किट भी होगी।

टेंडर अगले माह में खुल सकते हैं। दूसरे चरण में विभाग ने 200 अन्य पालकियां खरीदने का प्रपोजल सरकार को भेजा है। मंजूरी मिलते ही इन्हें खरीदने की प्रक्रिया शुरू होगी।

ओएसडी एंबुलेंस राजेश गुलेरी का कहना है कि 160 पालकी एंबुलेंस खरीद को टेंडर प्रक्रिया चल रही है। मिशन में ऐसे क्षेत्रों की स्टडी की जा चुकी है, जहां इन एंबुलेंस की सेवाएं दी जाएंगी।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन 108 एंबुलेंस की तर्ज पर बोट एंबुलेंस सेवा भी शुरू करने पर विचार कर रही है। ये एंबुलेंस ऐसे जलाशयों में चलेगी जो सड़कों से नजदीक हैं। इस संबंध में भी प्रपोजल तैयार किया जा रहा है।
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क्यों पड़ी पालकी एंबुलेंस की जरूरत?

पहाड़ी राज्य हिमाचल में कई जिलों के सैकड़ों गांव आज भी सड़क से नहीं जुड़े हैं। कुछ सड़कें ऐसी भी हैं, जहां 108 एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। इस कारण मरीजों और गर्भवती महिलाओं को सड़क तक पहुंचाने में दिक्कत होती है।

मिशन के तहत ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है। इसके बाद पालकी एंबुलेंस सेवा शुरू करने का फैसला लिया गया। इस तरह के गांव प्रदेश के सभी जिलों में हैं।
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