सरकारी स्कूलों में नतीजे सुधारने के लिए पहली बार ग्रेडिंग की जाएगी।
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सरकारी स्कूलों में नतीजे सुधारने के लिए पहली बार ग्रेडिंग की जाएगी। 75 प्रतिशत से अधिक परिणाम देने वाले स्कूलों को ए ग्रेड, 60 से 74 प्रतिशत पर बी ग्रेड, 50 से 59 प्रतिशत पर सी और 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले स्कूलों को डी ग्रेड दिया जाएगा।
ग्रेडिंग के हिसाब से स्कूलों को मजबूत किया जाएगा। वीरवार को सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान की अध्यक्षता में हुई शिक्षा अधिकारियों की बैठक में यह फैसला लिया गया।
वीरवार शाम साढ़े चार से साढे़ छह बजे तक सचिवालय में दसवीं और जमा दो कक्षा के रिजल्ट की समीक्षा की गई। बैठक में फैसला लिया गया कि लगातार तीन साल तक शून्य रिजल्ट देने वाले शिक्षकों को निलंबित किया जाएगा।
बैठक में लिए गए ये अहम फैसले
बैठक में 25 प्रतिशत से कम परिणाम देने वाले शिक्षकों के तबादले करने पर भी मुहर लगाई गई।
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तीन साल के रिजल्ट की समीक्षा का भी फैसला लिया गया। उच्च शिक्षा निदेशालय को जल्द तीन साल के स्कूल वार वार्षिक परिणामों की रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए गए हैं।
बैठक में 25 प्रतिशत से कम परिणाम देने वाले शिक्षकों के तबादले करने पर भी मुहर लगाई गई। मुख्यमंत्री के ध्यान में मामला लाने के बाद तबादला आदेश जारी किए जाएंगे।
खाली पद बताए खराब रिजल्ट की वजह
खराब रिजल्ट पर शिक्षकों को दिए गए कारण बताओ नोटिस के जवाबों पर भी बैठक में चर्चा की गई। अधिकांश शिक्षकों ने दसवीं और जमा दो कक्षा के खराब रिजल्ट का बड़ा कारण स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को बताया है।
इसके अलावा एसएमएसी, पीटीए से हुई शिक्षकों की नियुक्तियों और शैक्षणिक सत्र के बीच में शिक्षकों के तबादलों को भी खराब रिजल्ट का कारण बताया है।
19 स्कूलों का रिजल्ट शून्य
इस साल दसवीं के परिणाम में 16 स्कूल फिसड्डी साबित हुए हैं। इन स्कूलों का रिजल्ट शून्य रहा है।
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इस साल दसवीं के परिणाम में 16 स्कूल फिसड्डी साबित हुए हैं। इन स्कूलों का रिजल्ट शून्य रहा है। जमा दो के परिणाम में तीन स्कूलों का रिजल्ट शून्य है। दसवीं के 102 स्कूलों का परिणाम 20 प्रतिशत से कम रहा है।
जमा दो के 24 स्कूलों का परिणाम 20 प्रतिशत से कम है। 25 प्रतिशत से कम विषय वार परिणाम देने वाले दसवीं के 166 स्कूलों और जमा दो के 108 स्कूलों के शिक्षकों को सरकार ने नोटिस जारी किया था।