हाल ही में डीजी होमगार्ड के पद से रिटायर हुए पूर्व पुलिस महानिदेशक आईडी भंडारी के हमले के बाद प्रदेश की वीरभद्र सरकार बैकफुट पर चली गई है।
सरकार के आला अफसर अब भंडारी के पूछे गए सवालों पर जवाब देते नहीं फिर रहे हैं। पहली बार मीडिया के सामने अपनी खामोशी तोड़ने वाले भंडारी ने गई बड़े सवाल खड़े किए हैं।
इससे सरकार की साख पर ही सवाल खड़ा हो गया है। अब देखना है कि आने वाले दिनों में सरकार इसका क्या जवाब देती है।
टैपिंग केस की जांच पर ही उठे सवाल
पूर्व डीजी आईडी भंडारी से जुड़े फोन टैपिंग केस की जांच ही अब सवालों के घेरे में आ गई है। डीजी ने कहा था कि उनसे जांच अधिकारी ने फोन टैपिंग को लेकर पूछताछ की।
मगर एक साल बाद हुई इस पूछताछ में महज दो लोगों के फोन टैप करवाने को लेकर पूछताछ की गई। टैपिंग के इस केस में 1400 से ज्यादा लोगों के अवैध रूप से फोन टैप होने के आरोप लगे हैं।
ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर जांच अधिकारी ने महज दो फोन काल्स के बारे में ही पूछताछ क्यों की। यह पूछताछ विजिलेंस के एसपी स्तर के अधिकारी ने की है।
विजिलेंस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में
भंडारी के आरोपों के बाद स्टेट विजिलेंस की निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। पीडब्ल्यूडी में होने वाले तारकोल घपले और सरकार के आला अफसरों से पूछताछ न करने को लेकर जांच एजेंसी सवालों के घेरे में हैं।
क्या विजिलेंस महज सरकार के इशारों पर ही काम करने वाली एजेंसी बनकर रह गई है, इस पर अब सवाल उठने लगे हैं। उधर, आईडी भंडारी का कहना है कि विजिलेंस और सीआईडी में कुछ ऐसे अफसर भी हैं जो सरकार को गुमराह करते हैं।
बहरहाल, फोन टैपिंग के आरोपों से घिरे आईडी भंडारी इस केस में कितना दोषी बनते हैं, ये आने वाले दिनों में पता चल जाएगा। फिलहाल उन्होंने खुद को पाक साफ करार दे दिया है।