फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बस एक क्लिक में पढ़िए वीरभद्र कैबिनेट के ये 15 बड़े फैसले

विज्ञापन
विज्ञापन
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अगुवाई में बुधवार को हुई कैबिनेट की एक अहम बैठक में पंचायत सहायकों के नियमितीकरण, पंचायतों के चुनाव समेत कई मुद्दों पर चर्चा की गई। इनमें से कई प्रस्तावों पर सरकार ने मंजूरी दे दी है। वहीं, कई प्रस्ताव आपसी सहमति के चलते मंजूर नहीं हो पाए। पहला फैसला पंचायत सहायकों से जुड़ा है।
विज्ञापन


सरकार ने पंचायत सहायकों को झटका दे दिया है। सरकार की ओर से 1132 पंचायत सहायकों को नियमित करने का मामला कैबिनेट में ले जाया गया था। कैबिनेट की बैठक में इस मामले पर लंबी चर्चा हुई। कुछ मंत्री पंचायत सहायकों को नियमित करने के पक्ष में थे जबकि कइयों ने इस पर ऐतराज जताया। लंबी चर्चा के बाद इसे मामले को पेंडिंग में डाल दिया।

नियमितीकरण के पक्ष में थे सीएम

सूत्र बतातें है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपनी ओर से इस मामले पर स्वीकृति प्रदान कर दी थी लेकिन बाद में मंत्रियों की इस मामले पर बहस छिड़ गई। कई मंत्री इसके पक्ष में थे जबकि कई नहीं। ऐसे में प्रस्ताव पर मंजूरी नहीं मिल पाई।

पंचायतीराज विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 1132 पंचायत सहायक ऐसे है जिनको सेवाएं देते हुए पांच साल से अधिक समय हो गया है। विभागों में 5 साल व इससे अधिक कार्यकाल पूरा करने वाले कर्मचारियों को नियमित किया गया है, लेकिन पंचायत सहायक को अभी इस लाभ से वंचित रखा गया है। अब कैबिनेट में ये मामला फिर टल गया। ऐसे में पंचायत सहायकों को निराशा ही हाथ लगी है।

नवंबर-दिसंबर में होंगे पंचायत चुनाव

सरकार का दूसरा बड़ा फैसला पंचायत चुनाव से जुड़ा है। हिमाचल में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नवंबर-दिसंबर महीने में होंगे। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में दो चरणों में चुनाव करवाने पर सहमति बन गई है। दुर्गम क्षेत्रों में नवंबर महीने के आखिरी सप्ताह और अन्य क्षेत्रों में दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में चुनाव होंगे। सर्दियों में हिमपात से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका रहती है।

चुनाव के समय बर्फीले क्षेत्रों में मतदान प्रभावित हुआ था। पिछले अनुभव को देखते हुए चुनाव नवंबर-दिसंबर में करवाने की तैयारी है। चुनाव के लिए रोस्टर भी शीघ्र फाइनल हो जाएगा। इस बार केवल उपप्रधान का पद ही पिछली बार की तरह अनारक्षित होगा। पंचायतों और जिला परिषद वार्डों के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी सरकारी स्तर पर चल रही है। इसे भी जल्द अंजाम दिया जा सकता है।

सरकार ने किंग्स इलेवन को दी बड़ी राहत

तीसरा फैसला- सरकार ने बॉलीवुड स्टार प्रिटी जिंटी की किंग्स इलेवन पंजाब टीम को बड़ी राहत दी है। साल 2011 में धर्मशाला में हुए आईपीएल मैचों के दौरान लगाए गए 100 प्रतिशत मनोरंजन टैक्स को 90 प्रतिशत घटा दिया है। बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने टीम से सिर्फ दस प्रतिशत मनोरंजन टैक्स वसूलने का फैसला लिया है।

टीम प्रबंधन ने राज्य सरकार से मनोरंजन टैक्स घटाने को आवेदन किया था। साल 2012 में राज्य सरकार ने मनोरंजन टैक्स को 10 प्रतिशत कर दिया था लेकिन साल 2011 का मामला हल नहीं हुआ था। इंडियन प्रीमियर लीग के धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम में हुई मैचों के टैक्स की वसूली को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने बीते दो साल तक कड़ा रुख अपनाए रखा था।

अब सरकार अपने स्तर पर चलाएगी नेशनल फूड प्रोसेसिंग मिशन

चौथा फैसला- केंद्र सरकार ने नेशनल फूड प्रोसेसिंग मिशन स्कीम को बंद कर दिया है। बेरोजगारों को अपना रोजगार चलाने के लिए केंद्र सरकार इस स्कीम के तहत हिमाचल को 75 -25 स्कीम रेशो के हिसाब से पैसा देता था। लेकिन केंद्र ने इस स्कीम को बंद कर दिया है।

अब प्रदेश सरकार ने इस स्कीम को अपने स्तर पर चलाने का फैसला लिया है। खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से मंत्रिमंडल की बैठक में लाए गए इस मामले को मंजूरी प्रदान की गई। प्रदेश सरकार रोजगार चलाने वाले लोगों को इस स्कीम के तहत स्वयं सब्सिडी प्रदान करेगी।

प्रदेश सरकार ने इस स्कीम का नाम बदलकर स्टेट मिशन आफ फूड प्रोसेसिंग मिशन रखा है। कोल्ड चेन प्रोजेक्ट पर प्रदेश सरकार लोगों को 50 फीसदी सब्सिडी देगी जबकि प्राइमरी प्रोसेसिंग ग्रेडिंग पैकिंग में 75 फीसदी सब्सिडी, मीट शाप व अन्य एक्यूमेंट पर 75 फीसदी सब्सिडी, रिफिल व्हीकल खरीदारी पर भी 75 फीसदी की सब्सिडी जारी की जाएगी।

ये रहे मंत्रिमंडल के अन्य प्रमुख फैसले

5वां फैसला- हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने 1000 करोड़ रुपये की बागवानी विकास परियोजना को दी मंजूरी।
6वां- मंत्रिमंडल ने प्रदेश में सात रज्जू मार्ग परियोजनाओं को स्वीकृति दी।
7वां- विभिन्न विभागों 250 पद भरने को मंजूरी दी गई।
8वां- तीन श्रेणियों में होंगे नौ दालों के टेंडर, जो सस्ती पड़ेंगी उन्हें रियायत पर उपभोक्ताओं को देंगे।
9वां- वक्फ बोर्ड की विवादित संपत्तियों पर सुनवाई के लिए बनेगा वक्फ बोर्ड।
10वां- 960 मेगावाट क्षमता की जंगी-थोपन-पोवारी पन बिजली परियोजना को मैसर्ज रिलायंस एनर्जी लिमिटेड को आवंटित करने की मंजूरी।
11वां- प्रदेश की सभी पंचायातों को इंटरनेट से जोड़ने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आप्टिकल फाईबर नेटवर्क को स्वीकृति प्रदान की गई।

ये फैसलें भी हैं अहम

12वां- 5 मेगावाट क्षमता तक की 217 लघु एवं सूक्ष्म पन बिजली परियोजनाओं के आवंटन को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
13वां- भूमि की दूरी के आधार पर स्टॉम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क निर्धारित करने के लिए सर्कल रेटों के युक्तिकरण को स्वीकृति मिली।
14वां- सभी अतिरिक्त उपायुक्तों एवं अतिरिक्त जिला दंडाधिकारियों को प्रशासक के तौर पर नियुक्त करने, सभी मंडलीय आयुक्तों को आयुक्तों के तौर पर नियुक्त करने और भू-अधिग्रहण, पुनर्वास और पुर्नस्थापन अधिनियम, 2013 में सही मुआवजे के अधिकार और पारदर्शिता के लिए सभी उपमण्डलाधिकारियों (नागरिक) और विभिन्न विभागों के सभी भू-अर्जन कलेक्टरों को कलेक्टर के तौर पर नियुक्त करने को मंजूरी प्रदान की है।
15वां- सेब पेड़ कटान मामले को लेकर भी कैबिनेट में चर्चा हुई। हाईकोर्ट में दी गई स्टेटस रिपोर्ट से मंत्रियों को अवगत करवाया गया। छोटे किसानों-बागवानों को राहत देने की मांग भी बैठक में उठी।

बैठक छोड़कर चले गए बाली और कौल सिंह

वहीं, परिवहन मंत्री जीएस बाली और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर कैबिनेट बैठक को बीच में छोड़कर चले गए। बताया जा रहा है कि बाली किसी बात पर नाराज होकर चले गए। उन्हें मनाने की कोशिश की गई लेकिन वे नहीं मानें। हालांकि कौल सिंह स्वास्थ्य कारणों की वजह से पूरी मीटिंग में नहीं बैठ सके।

कौल सिंह के बैठक में पहुंचने पर लगे ठहाके
स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह के पहुंचने पर मंत्रिमंडल में मंत्रियों ने खूब ठहाके लगाए। एक मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि कौल सिंह नया दिल लेकर आए हैं... दिक्कत कोई नहीं। इस दौरान मंत्रियों ने ठाकुर कौल सिंह के स्वास्थ्य के बारे में पूछा। कौल सिंह ने कहा कि जनता की दुआओं और आप लोगों के सहयोग से मैं अब ठीक हूं।

इन विभागों में भरेंगे पद

प्रदेश सहकारी विभाग में अनुबंध आधार पर कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आईटी) के 40 पद सृजित करने, सहकारी विभाग में आगामी तीन वर्षों  2015-15, 2016-17 और 2017-18 में प्रत्येक वर्ष अनुबंध आधार पर निरीक्षक (आडिट) के 40 पदों को भरने, किन्नौर जिले में तृतीय श्रेणी के 27 पदों को भरने, स्वास्थ्य सुरक्षा विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के सात रिक्त पद भरने, पंचायती राज विभाग में अनुबंध आधार पर जूनियर इंजीनियरों के 16 पद भरने, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर का एक पद सृजित करने, प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में अनुबंध आधार पर कनिष्ठ कार्यालय सहायक आईटी के नौ पद सृजित करने और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आईटी) के 25 पद सृजित करने एवं भरने का निर्णय लिया।

नवस्तरोन्नत तहसीलों में अनुबंध आधार पर 30 पद सृजित करने का निर्णय लिया गया है, जिनमें अनुबंध आधार पर तहसील कल्याण अधिकारियों, कनिष्ठ कार्यालय सहायकों के पदों के साथ 10 दैनिक भोगियों के पद भी शामिल हैं। आयुर्वेद विभाग में अनुबंध आधार पर मैकेनिक के एक रिक्त पद को भरा जाएगा। वन विश्राम गृहों एवं निरीक्षण कुटीरों में अनुबंध आधार पर बहुउद्देशीय कर्मियों के 50 पद सृजित करने का निर्णय लिया गया।

1000 करोड़ की बागवानी विकास परियोजना को मंजूरी

हिमाचल मंत्रिमंडल ने 1000 करोड़ रुपये की बागवानी विकास परियोजना को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में तय किया गया कि विश्व बैंक से वित्तपोषित 1000 करोड़ रुपये की बागवानी विकास परियोजना के लिए एक उच्चस्तरीय सोसायटी बनाई जाएगी। सोसायटी इस बजट से बागवानी और अन्य विभागों के अधीन फार्मों का प्रबंधन करेगी। परियोजना में प्रोजेनी-कम-डेमोस्ट्रेशन आर्चिड (पीसीडीओ) प्रबंधन के लिए विशेष उद्देश्य वाहन खरीदने को भी मंजूरी दी गई।

बागवानी और अन्य विभागों के पीसीडीओ के प्रबंधन को संबंधित विभाग एवं विशेष उद्देश्य वाहन के मध्य हस्ताक्षरित समझौते की तय शर्तों और नियमों के अनुसार विशेष उद्देश्य वाहन को सौंपने को मंजूरी दी गई। सोसायटियों अथवा विशेष उद्देश्य वाहन का कार्य विभिन्न फलों, सब्जियों, फूलों इत्यादि के बगीचों का प्रदर्शन और आधुनिक नर्सरियों की स्थापना करना होगा।

यह पीसीडीओ का प्रबंधन भी तय करेगा, जिससे नियमित आधार पर गुणात्मक पौध सामग्री उपलब्ध हो सके। यह प्रोजेक्ट बेहतर फसल प्रबंधन के अतिरिक्त आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन और वैकल्पिक विपणन प्रबंधन की व्यवस्था भी करेगा। बागवानी क्षेत्र के विकास के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के उचित उपयोग के साथ-साथ फार्म स्तर पर बागवानी क्षेत्र भी मजबूत होगा।
विज्ञापन

जंगी थोपन प्रोजेक्ट रिलायंस कंपनी को आवंटित

प्रदेश मंत्रिमंडल ने 960 मेगावाट क्षमता की जंगी थोपन पनबिजली परियोजना को मैसर्ज रिलायंस एनर्जी लिमिटेड को आवंटित करने की मंजूरी प्रदान की है। बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि यदि रिलायंस एनर्जी लिमिटेड इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करती तो परियोजना को नए सिरे से बोली के लिए विज्ञापित किया जाएगा। उधर, मंत्रिमंडल ने मंडी जिले में 2 मेगावाट की चाहोड जल विद्युत परियोजना के नवीकरण को मंजूरी दी है।

ब्रैकल कंपनी को साल 2006 में जंगी थोपन प्रोजेक्ट आवंटित किया गया था। विवादों में घिरने के बाद पूर्व सरकार ने इसे 2009 में रद्द कर दिया था। प्रोजेक्ट के आवंटन की प्रक्रिया तो चली, लेकिन आवंटन नहीं हो सका। इस साल भी टेंडर प्रक्रिया में महज एक ही कंपनी पहुंची। अभी तक यह मामला अधर में ही लटका था।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद रिलायंस एनर्जी को प्रोजेक्ट लेने का मौका दिया गया है। उधर, सरकार के इस फैसले के बाद जंगी थोपन प्रोजेक्ट के लिए ब्रैकल कंपनी की ओर से दी गई अपफ्रंट मनी की करीब 280 करोड़ की राशि को वापस करने का रास्ता भी साफ होता नजर आ रहा है। हालांकि, अपफ्रंट मनी लौटाने को लेकर बुधवार को कैबिनेट ने कोई फैसला नहीं लिया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें