हिमाचल प्रदेश में स्पाइस पार्क बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश कृषि विवि पालमपुर की 10 एकड़ भूमि को भारतीय स्पाइस बोर्ड को लीज पर देने का निर्णय लिया गया है। बैठक में कृषि विवि पालमपुर के परिसर में विज्ञान केन्द्र निर्माण के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद के नाम पर भूमि हस्तांतरित करने को स्वीकृति प्रदान की गई।
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इसके बाद अब भारतीय स्पाइस बोर्ड पालमपुर में स्पाइस पार्क बनाएंगे। जहां पर हिमाचल में होने वाली स्पाइस क्रॉप के बारे में निरीक्षण कर उनकी पैदावार की जाएगी। प्रदेश में स्पाइस क्रॉप में अदरक, लहसुन, हल्दी, दालचीनी जैसी फसलें शामिल हैं।
इसके अलावा पार्क में स्पाइस क्रॉप की प्रोसेसिंग, पैकेजिंक और मार्केटिंग के लेकर भी सुविधाएं उपलब्ध होगी। प्रदेश के पहले स्पाइस पार्क बनने से युवाओं के रोजगार के साधन खुलने के अलावा क्षेत्र का विकास होगा।
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कैल पत्तियों का परमिट शुल्क आधा
हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाने वाले कैल की पत्तियों का परमिट शुल्क आधा कर दिया गया है। कैबिनेट में परमिट शुल्क को एक हजार प्रति क्विंटल से कम करके पांच सौ रुपये कर दिया गया है। इतना ही नहीं पहली बार कत्था निकालने के बाद खैर की चिप्स को वन उत्पाद के रूप में निर्यात की अनुसूची-2 में शामिल किया गया है।
सरकार की ओर से पहले कैल की पत्तियों के लिए परमिट शुल्क एक हजार रुपये प्रति क्विंटल किया गया था। इसके कारण जंगलों से कैल की पत्तियों का कोई खरीदार नहीं मिल रहा था। ऐसे में यह पत्तियां जंगल में पड़ी रहती थीं, जिस कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई थीं।
इसी प्रकार कत्था निकालने के बाद खैर की चिप्स जंगलों में पड़ा रहता था, जिससे आग लगने की घटनाएं सामने आ रही थी। इससे निजात दिलाने के लिए सरकार ने इसे 10 रुपये प्रति क्विंटल की दर से परमिट शुल्क तय कर दिया गया है, जिससे उसे जंगलों से बाहर निकाला जा सके। इसका भी उपयोग इंधन के तौर पर किया जाता है।
खाली पद भरने को स्वीकृति
कैबिनेट ने गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में कमांडेंट होमगार्डों के चार पद अनुबंध आधार पर भरने को मंजूरी दी। इसके अतिरिक्त टांडा मेडिकल कॉलेज में फिजियोथैरेपिस्ट के दो पद सृजित करने का निर्णय लिया।
निर्वाचन कानूनगो के खाली नौ पद राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से अनुबंध आधार पर भरे जाएंगे। मंत्रिमंडल ने सोलन व अंब में हाल ही में स्थापित न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालयों में सहायक जिला न्यायवादियों के दो पद भरने को भी स्वीकृति प्रदान की।
महंगी है घर वैध करने की पॉलिसी
प्रदेश के मंत्रियों को भी भवन वैध कराने की पॉलिसी महंगी लग रही है। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मंत्रियों ने इस पॉलिसी पर एतराज जताया। मंत्रियों ने बताया कि लोगों को राहत देने के लिए लाई गई पॉलिसी महंगी है।
इसके तहत प्रदेश के अवैध भवन मालिक घरों को वैध नहीं करा सकेंगे। एक मंजिल को नियमित कराने के लिए लोगों को लाखों चुकाने पड़ेंगे। प्रदेश में 30 हजार के करीब अवैध घर हैं, इन घरों के मालिक लंबे समय से घरों को वैध कराने की मांग कर रहे थे।
प्रदेश सरकार ने इसके लिए पॉलिसी लाई लेकिन ये महंगी होने पर लोगों ने आवेदन करने से मना कर दिया। टीसीपी कार्यालय में अभी तक घर वैध कराने के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है। सरकार की ओर से लाई गई पॉलिसी का जनता विरोध कर रही है। निजी वास्तुकार पहले ही इस पॉलिसी को महंगी बातकर इसका विरोध कर रहे हैं।
सब कमेटी की सिफारिशों पर नहीं हुआ विचार
प्रदेश में आय बढ़ाने के लिए कैबिनेट सब कमेटी रिसोर्स मोबलाइजेशन की ओर से की गई सिफारिशों पर कैबिनेट ने विचार करने से साफ तौर पर मना कर दिया। कहा गया कि सब कमेटी पूरी कंकरीट रिपोर्ट लेकर कैबिनेट में आए।
इसके बाद ही उस पर किसी प्रकार का विचार किया जाएगा। कमेटी के एक सदस्य की ओर से कहा गया कि अगले तीन माह में कमेटी की ओर से रिपोर्ट तैयार करने के बाद कैबिनेट के समक्ष पेश किया जाएगा।
ध्यान रहे कि 12 सितंबर को सब कमेटी की ओर से लिए गए फैसले को कैबिनेट में ले जाया गया था। जहां से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद ही धरातल पर उतारने की तैयारी थी। कैबिनेट सब कमेटी की जितनी भी बैठकें होंगी, उन बैठकों में होने वाले निर्णयों को कैबिनेट में मुहर लगने के बाद क्रियान्वयन शुरू करने की बात की जा रही थी, लेकिन कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मानने से मना कर दिया।
कैबिनेट ने पांच मेगावाट के लोअर सुमेज, 4.5 मेगावाट के तोहुक और पांच मेगावाट के करेरी पावर प्रोजेक्ट को बूट आधार पर निर्माण के लिए नए सिरे से टेंडर आमंत्रित करने का फैसला लिया।
बैठक में किन्नौर जिले में 60 मेगावाट क्षमता के टीडोंग जल विद्युत परियोजना को बिना विस्तार शुल्क लिए छ: माह की अवधि तक टाइमलाइन विस्तार देने का भी निर्णय लिया गया। पांच मेगावाट की कुरपन जल विद्युत परियोजना स्थापित करने के लिए मैसर्ज तारिणी इलैक्ट्रिक पावर लिमिटेड के पक्ष में कुल्लू जिले में सरकारी भूमि पट्टे पर देने का निर्णय लिया।