दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में अक्तूबर में होने वाली नोबेल पुरस्कार विजेताओं की विश्व समिट में धर्मगुरु दलाईलामा को निमंत्रण मिलने के बावजूद वीजा नहीं मिल रहा है। काफी समय से वीजा का मामला लटका पड़ा है।
अब इसका नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने विरोध भी शुरू कर दिया है। 14 नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दलाईलामा को वीजा देने की मांग की थी। लेकिन बात नहीं बन पाई।
अब जिन 14 लोगों ने पत्र लिखा है, उनमें दो 29 सितंबर को धर्मशाला आ रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि दलाईलामा को वीजा दिलाने के लिए दक्षिण अफ्रीका पर धर्मशाला से दबाव की रणनीति बनाई जाएगी। चर्चा है कि दक्षिण अफ्रीका चीन के कथित दबाव के चलते दलाईलामा को वीजा नहीं दे रहा है।
दलाईलामा से मिलेंगे नोबेल पुरस्कार विजेता
विश्व भर से चार नोबेल पुरस्कार विजेता धर्मशाला में बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा से मिलने आ रहे हैं। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता जोडी विलियम्स, लेमाह गबोई, तवाकोल करमान, शिरिन इबादी 29 सिंतबर को मैकलोडगंज पहुंचेंगे।
नोबेल शांति पुरस्कार विजेता एक अक्तूबर को साझा पत्रकार वार्ता भी करेंगे। दुनिया भर से आने वाले नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं को केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने बुलाया है। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन का सूचना एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग 14वें दलाईलामा को नोबेल शांति पुरस्कार देने की 25वीं वर्षगांठ पर 2 अक्तूबर को महात्मा गांधी जयंती पर मैकलोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में समारोह आयोजित कर रहा है।
इस दौरान धर्मगुरु दलाईलामा अनुयायियों को संबोधन भी देंगे। उनके साथ विश्व भर के नोबेल पुरस्कार विजेता मौजूद रहेंगे। विश्व भर से नोबेल पुरस्कार विजेता मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने, अंतर धार्मिक सद्भाव, तिब्बतियन संस्कृति का संरक्षण करने के लिए दलाईलामा के प्रयासों का समर्थन और प्रशंसा करने के लिए पहुंच रहे हैं।
ये नोबेल पुरस्कार विजेता आएंगे
अमेरिकी निवासी जोडी विलियम्स को 1997 में अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाकर बारूदी सुरंगों को प्रतिबंधित करने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। ईरान की पहली महिला जज शिरिन इबादी को 2003 में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को किए प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।
लाइबेरिया निवासी लेमाह गबोई को महिलाओं के अधिकारों के लिए अहिंसात्मक संघर्ष करने को लेकर 2011 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। यमन की पत्रकार, राजनीतिज्ञ और अल इसलाह राजनीति पार्टी एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता तवाकोल करमान को 2011 में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के लिए अहिंसात्मक संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।