विधायक रणधीर शर्मा ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि शिमला से कार्यालय शिफ्ट करने के पैमाने क्या हैं और किस आधार पर शिफ्ट किए जा रहे हैं। क्या किसी व्यक्ति विशेष को लाभ देने या किसी अधिकारी को सजा देने के लिए ऐसे फैसले हो रहे हैं। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला में ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है। शिमला 25,000 से एक लाख की आबादी के लिए बना था। अब शिमला के साथ लगते क्षेत्रों को मिलाकर 4 से 5 लाख तक आबादी हो गई है। सुबह यदि कोई गाड़ी लेकर निकले तो अकसर एक घंटा ट्रैफिक जाम में रहता है। सीएम ने कहा कि यह फैसला किसी अधिकारी को सजा देने के उद्देश्य से नहीं किया गया है। प्रदेश में लगभग 1,000 करोड़ के भवन खाली पड़े हैं। कांगड़ा में इनकी संख्या सबसे अधिक है।
एक तरफ सरकारी भवन खाली पड़े हैं और शिमला में निजी भवनों के लिए किराया चुकाना पड़ रहा है। जो भी कार्यालय शिफ्ट हो रहे हैं, वहां के कर्मचारियों से च्वाइस ली जाएगी। अगर वे शिमला में रहना चाहते हैं तो हम उन्हें यहीं रखेंगे और उनकी जगह नए कर्मी भर्ती होंगे। पहले कामगार कल्याण बोर्ड को हमीरपुर, कौशल विकास निगम को मंडी, वन्य प्राणी-हिमाचल प्रदेश अचल भू संपत्ति को कांगड़ा, पर्यटन निगम को कांगड़ा, नशा निवारण बोर्ड को हमीरपुर और एक पुलिस ट्रेनिंग ऑफिस को कांगड़ा स्थानांतरित किया जा चुका है।
उधर, नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने सवाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी नहीं मिलने को सदन का अपमान बताया। वीरवार को प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में लगभग 1.36 लाख सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने का फैसला किया। यह फैसला लेने पर केंद्र सरकार की ओर से जो करीब 1600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण मिलता था, वह बंद हो गया। सरकार के कार्यकाल में जितने भी कर्मचारी लगे हैं और आने वाले समय में भी जो कर्मचारी लगेंगे, उन सभी को पुरानी पेंशन मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जो सरकारी कर्मचारी और अधिकारी एनपीएस से ओपीएस में शिफ्ट हुए हैं, उनका ईपीएफ के रूप में जो शेयर है, वह उनके पेंशन फंड में है। करीब 10,000 करोड़ रुपये हमारा एनपीएस का शेयर, जो पेंशन फंड में है, उसे शेयर मार्केट में लगाया जा रहा है। अभी यह फंड नहीं मिला है। जैसे ही हमें यह फंड मिल जाएगा तो कर्मचारियों का शेष एरियर चुका दिया जाएगा। उधर, नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मैं हैरान हूं कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हमने यह राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया है। यह तो कांग्रेस की पहली चुनाव गारंटी थी।