लोगों को अब बिना बीज वाला रसीला अनार खाने को मिलेगा। हिमाचल के बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा (कुल्लू) के वैज्ञानिकों ने कंधारी अनार की नई बीज रहित किस्म विकसित की है। अनार की यह किस्म काबुली, कंधारी और भगवा किस्मों के संकर से तैयार की गई है।
इस किस्म को डॉ. जयंत कुमार और डॉ. किशोर खौसला ने 16 वर्षों के अनुसंधान के बाद विकसित किया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इसे लगाने से बागवानों की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकेगी। नई किस्म के फल रसदार और बड़े आकार वाले होंगे।
क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा से सह निदेशक पद से सेवानिवृत्त डॉ. जयंत कुमार ने बताया कि सन् 2000 में अनार की उन्नत किस्म तैयार करने के लिए इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी। नई किस्म को विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों ने अनार की छह हजार संकर किस्मों को अपने प्रयोग का हिस्सा बनाया।