नियमितीकरण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आए फैसले के विरोध में अब हिमाचल के होमगार्ड पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे। हिमाचल पुलिस के बराबर भत्ते देने के मामले में भी उच्चतम न्यायालय में अरजी करेंगे कि इसे उनकी नियुक्ति के समय से ही दिया जाना चाहिए। हिमाचल के गृह रक्षकों की ओर से इस मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अश्वनी गुप्ता ने इसकी पुष्टि की है।
सुप्रीम कोर्ट ने नियमितीकरण के लिए होमगार्डों की ओर से दायर अलग-अलग याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इससे प्रदेश के लगभग आठ हजार होमगार्डों को वेतन या मानदेय बढ़ने की आंशिक राहत तो मिली है, मगर वे नियमित नहीं हो पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल के होमगार्डों के एक संगठन का मामला रिप्रेजेंट करने वाले अधिवक्ता अश्वनी गुप्ता ने कहा है कि अब होमगार्डों को मासिक सेलरी पुलिस के स्केल के बराबर मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस फैसले को पढ़कर यह प्रतीत होता है कि यह वेतन होमगार्डों को उस तिथि से देय होगा, जबसे वे नियुक्त हैं। इस बारे में फिर से याचिका डाली जाएगी। इससे पहले सरकार के अंतिम आदेश का इंतजार किया जाएगा। ये आदेश तीन महीने में जारी करने होंगे।
सबसे अहम पहलू यह हैं कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के गृह रक्षकों के बारे में नियम बनाने के आदेश दिए थे। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने बरकरार रखा। हिमाचल, पंजाब और दिल्ली के होमगार्ड्स पर यह फैसला दो जजों की पीठ ने दिया है।