लापरवाही से डॉक्टर, नर्सों सहित अन्य कर्मचारियों के एचआईवी पॉजिटिव होने का खुलासा होने के बाद हिमाचल के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। कांगड़ा जिले के एक बड़े अस्पताल से लेकर शिमला में स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय और राज्य सचिवालय तक इस मामले पर सब चिन्तित रहे।
प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना के समक्ष निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं ने भी इस बारे में स्थिति स्पष्ट की। कांगड़ा जिले में आधा दर्जन एचआईवी पॉजिटिव स्वास्थ्य कर्मचारी अंडर ट्रीटमेंट हैं। एआरटीसी सेंटर के पुख्ता सूत्रों के अनुसार जिला भर के अस्पतालों में सेवाएं दे रहे ये छह कर्मचारी एचआईवी पॉजिटिव हैं। इन कर्मचारियों की यहां काउंसलिंग की जा रही है।
काउंसलिंग में इन्हें बताया जा रहा है कि अस्पताल में मरीजों और घर में सदस्यों के साथ उन्हें कैसे रहना है। सीएमओ आरएस राणा ने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव मरीज की जानकारी गुप्त रखी जाती है। लोगों को जागरूक करने के लिए एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जागरूकता शिविर लगाए जाते हैं। इन शिविरों में एचआईवी की जांच मुफ्त की जाती है जबकि रिपोर्ट को गोपनीय रखा जाता है।
प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने कहा कि इस बारे में सीएमओ कांगड़ा से बात की गई है। उनका कहना है कि उन्होंने एचआईवी पीड़ितों पर ऐसी कोई बात नहीं की है। सक्सेना बोले कि एहतियात के तौर पर उन्होंने एड्स नियंत्रण सोसाइटी के परियोजना निदेशक को भी ऐसे मामलों पर ध्यान देने को कहा है।
ये लक्ष्ण दिखें तो करवा लें एचआईवी टेस्ट
जिला कांगड़ा एड्स नियंत्रण कार्यक्रम अधिकारी सुरेंद्र निखिल गुप्ता कहते हैं कि जब बुखार, दस्त, डायरिया, मुंह में छाले आदि सामान्य बीमारियां आम दवा से ठीक न हों और 10 प्रतिशत वजन अचानक घट जाए तो एचआईवी टेस्ट करवा लेना चाहिए।
आम दवाई से ये बीमारियां ठीक न होना एचआईवी पॉजिटिव के लक्षण होते हैं। बीपी, शूगर की तरह रोजाना दवाई खाने से इस रोग से लड़ा जा सकता है। लोगों को इस बीमारी से डरने की नहीं बल्कि जागरूक होने की जरूरत है। करीब 10 साल बाद जब एक साथ कई रोग मरीज को घेर लेते हैं तो संक्रमण एड्स का रूप धारण कर लेता है। इसके बाद मरीज को दवाई ताउम्र खानी पड़ती है।
ये हैं एचआईवी पॉजिटिव के लक्षण
एआरटीसी के काउंसलर ने बताया कि एचआईवी का वायरस जब व्यक्ति के शरीर में दाखिल होता है तो यह धीरे-धीरे बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम कर देता है। वजन लगातार कम होता जाता है। एक माह में दस किलो तक वजन घट सकता है।
मरीज को टीबी, बुखार और डायरिया जैसी संक्रामक बीमारियां घेर लेती हैं। सामान्य दवाइयों से मरीज ठीक नहीं होता। जांच के बाद मरीज का एचआईवी टेस्ट करवाया जाता है। इसके बाद ट्रीटमेंट शुरू होता है। जब मरीज को तीन से चार बीमारियां एक साथ घेर लेती हैं तो मरीज का सीडी फोर टेस्ट करवाया जाता है। इसके बाद मरीज को एड्स पीड़ित घोषित कर दिया जाता है।