शिमला के रोहड़ू में सरस्वती नगर पंचायत में गिरा भवन तीन नहीं बल्कि पांच मंजिला था। हैरानी इस बात की है कि यह भवन सरकारी भूमि पर बना था और अवैध रूप से बनाया गया था। भवन ढहने के बाद सरकारी तंत्र की तमाम कारगुजारी की पोल खुल रही है।
शिकायत के बाद सरकारी भूमि पर बने भवन में बिजली और पानी तो मिला ही बीयर बार तक का लाइसेंस दे दिया गया। राहत में जुटी टीम के सर्च अभियान में कई खुलासे हुए हैं। यहां भवन के चार लेंटर थे, जबकि, पांचवीं मंजिल टीन की छत की डाली गई थी।
मलबे में टीन की चादरें मिली हैं। इस खुलासे के बाद भवन निर्माण के कई राज बाहर आए हैं। हाटकोटी कैंची पर बहुमंजिला भवन ढहने से दो लोगों की मौत हो गई। कोई पुख्ता नहीं कर रहा था कि भवन कितने मंजिल का था।
वर्ष 2010 में भवन मालिक जोगेंद्र सिंह चांजटा ने सरस्वती नगर से पंचायत के प्रधान का चुनाव जीता था। चुनाव में उनके प्रतिद्वंदी रहे कल्याण सिंह रावत ने अवैध भवन की शिकायत चुनाव आयुक्त के पास की थी और अतिक्रमण का आरोप लगाया था।
पहले एसडीएम एमआर धीमान की कोर्ट ने प्रधान को अयोग्य करार दिया। उसके बाद कमिश्नर के पास इसकी अपील की गई। वहां से दोबारा एसडीएम यशपाल सिंह वर्मा की अदालत ने भवन निर्माण को अवैध करार देकर प्रधान को डिसमिस करने के आदेश किए थे।