उन्होंने कहा कि मंडी का नाम बदलने को लेकर लोग खुलकर सुझाव दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी शिवरात्रि मेले को केवल बोलने में ही अंतरराष्ट्रीय मेला कहा जाता था, जबकि यह मेला अंतरराष्ट्रीय नहीं था।
जिला मंडी का नाम पहले प्रसिद्ध ऋषि मांडव के नाम से था। कहा जाता है की महान संत मांडव ने यहां घोर तपस्या की और अलौकिक शक्तियां भी अर्जित की। यह तपस्या उन्होंने कुल्लू के समीप कोलसरा नामक स्थान पर एक चट्टान पर बैठकर व्यास नदी के पश्चिमी तट पर बैठकर की थी, लेकिन समय के साथ ही इस नगरी का नाम मंडी हो गया।
साहित्यकार कृष्ण कुमार नूतन ने बताया कि इस नाम परिवर्तन का कारण यहां की नमक की खानें रही हैं। यहां गुम्मा में सफेद नमक और द्रंग में काले नमक की खानें होने के चलते देश-विदेश के व्यापारी यहां नमक का व्यापार करते थे। व्यापारिक नमक मंडी के नाम से प्रसिद्ध हो गया और इसका नाम मंडी पड़ गया।