जुलाई 2014 से बंद हिंदुस्तान-तिब्बत नेशनल हाईवे को बहाल करने के लिए प्रदेश सरकार नायाब तरीका अपनाने जा रही है। उरनी के पास भारी भूस्खलन से पूरा हाईवे सतलुज नदी में समा गया है। 150 मीटर के पैच पर अब बैली ब्रिज बनाने का फैसला लिया है। इसे भूस्खलन से बचाने के लिए इस पुल को चारों ओर से लोहे की मोटी परत से ढका जाएगा जो एक अस्थायी टनल की तरह होगा।
इससे ढांक से गिरने वाली मिट्टी एनएच पर गिरने के बजाय सीधे पुल के ऊपर से सतलुज में गिरेगी। सामरिक महत्व के इस मार्ग को बहाल करने के लिए प्रदेश सरकार गंभीर है। हालांकि, वैकल्पिक मार्ग तो है लेकिन ये जल्द बाधित हो जाता है और यहां अक्सर जाम लगा रहता है। इस प्रोजेक्ट पर करीब ढाई से तीन करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
ढांक से गिर रहे पत्थरों को रोकने के लिए रिटेनिंग वॉल लगाई जाएगी ताकि पत्थर नीचे न गिरें। लोक निर्माण विभाग नेशनल हाईवे ने इसके लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए हैं। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर एंड चीफ नरेश शर्मा का कहना है कि उरनी ढांक पर लगातार भूस्खलन हो रहा है। इसके चलते यहां लोहे का ब्रिज बनाकर उसे चारों ओर से लोहे की परत से ढका जाना है ताकि मिट्टी ऊपर से ही क्रॉस होकर ठिकाने लग जाए।
यहां से हो रहा भूस्खलन
बीआरओ यहां टनल बनाना चाहता था। कुछ समय बाद बीआरओ ने यह एरिया लोक निर्माण विभाग के सुपुर्द कर दिया। उनकी ओर से तैयार किया गया टनल प्रोजेक्ट लोक निर्माण को सौंप दिया गया है। विभाग का कहना है कि जिस तरह से बीआरओ यहां टनल का निर्माण करना चाह रहा था वह फिजिवल नहीं है। चूंकि उरनी के साथ ही यहां पहले ही एक टनल का निर्माण हुआ है, जिसमें पानी टपक रहा है। जमीन कच्ची है, ऐसे में अगर टनल का निर्माण किया जाता है तो हादसा भी हो सकता है।