पितरों के प्रति श्रद्धा का पर्व पितृपक्ष सोमवार से शुरू हो गया है। 24 सितंबर तक पितृपक्ष चलेगा। इस दौरान सभी मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। 16 दिन तक विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और भूमि पूजन सहित अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा।
पंडित योगेंद्र शर्मा का कहना है कि पुराणों के अनुसार जो मनुष्य श्राद्ध में जरूरतमंद ब्राह्मण या गरीब को भोजन करवाने में असमर्थ है, वो अपने पूर्वजों का स्मरण कर एक मुट्ठी काले तिल दान कर दें, इससे उनके पितृ तृप्त होंगे।
किसी कारणवश यदि यह भी संभव न हो तो साफ पानी में सात काले तिल डालकर पितरों को याद कर उन्हें जल समर्पित करें। श्रद्धा पूर्वक स्मरण मात्र से पूर्वज प्रसन्न हो जाते हैं।
क्या है पितृ पक्ष
पंचमुखी हनुमान मंदिर केलटी के पुजारी पंडित संजय शास्त्री के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अमावस्या तक का समय पितृपक्ष कहलाता है। इन दिनों श्रद्धा पूर्वक अपने पूर्वजों का श्राद्ध और पिंडदान करना चाहिए। इस दिनों जरूरतमंद ब्राह्मण को भोजन खिलाना चाहिए। कौवे और कुत्ते को भी अन्न देना श्रेष्ठ बताया गया है। कौआ पितरों का प्रतिनिधि माना जाता है।
पंडित संजय शास्त्री के अनुसार 08 सितंबर को पूर्णिमा है। पहला श्राद्ध 09 सितंबर को, दूसरा श्राद्ध 10 सितंबर को, तीसरा श्राद्ध 11 सितंबर को, चौथा श्राद्ध 12 सितंबर, पांचवां श्राद्ध 13 सितंबर, छठा श्राद्ध 14 सितंबर, सातवां श्राद्ध 15 सितंबर, आठवां श्राद्ध 16 सितंबर, नौवां श्राद्ध 17 सितंबर (सौभाग्यवती श्राद्ध)।
दसवां श्राद्ध 18 सितंबर, ग्यारहवां श्राद्ध 19 सितंबर, बारहवां श्राद्ध 20, सितंबर (साधू संन्यासी श्राद्ध), तेरहवां श्राद्ध 21 सितंबर, चौदहवां श्राद्ध 22 सितंबर (सर्वपितृ श्राद्ध), पंद्रहवां श्राद्ध 23 सितंबर और अमावस्या 24 सितंबर (अकाल व अज्ञात मृत्यु श्राद्ध) को है।