जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में दुर्लभ प्रजाति का हिमालयन घोरल (वन्य जीव) शोधार्थियों ने कैमरे में कैद कर लिया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के जीव लाहौल में होने की बातें सुनी थीं, लेकिन अब तस्वीरों से इसके पुख्ता प्रमाण मिले हैं। वन विभाग में तैनात वन रक्षक और शोधार्थी शिव कुमार तथा लोनिवि के कर्मचारी अमीर जस्पा ने उदयपुर वनमंडल में हिमालयन घोरल की तस्वीरें ली हैं।
जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी की पहाड़ियों पर कई तरह के पशु-पक्षी और जीव जंतु देखे जा रहे हैं। वर्ष 2018 में भारत सरकार की ओर से प्राणी शास्त्र के वैज्ञानिकों ने लाहौल में हिमालयन थार को अपने कैमरे में कैद किया था। इससे पूर्व 2017 में ही लोनिवि के कर्मी वन्य जीवों और पशु पक्षियों के शोधार्थी अमीर जस्पा ने म्याड़ की पहाड़ी पर कस्तूरी मृग को भी अपने डीएसएलआर कैमरे में कैद कर वन विभाग को इसके पुख्ता प्रमाण दिए हैं।
जस्पा ने बताया कि लाहौल में येलो हम्मर, बुलफिंज, पाइन बंटिंग, वेमेरस, रेड स्टार्ट समेत 39 पक्षियों की प्रजातियों के यहां होने के पुख्ता प्रमाण के साथ ई बर्ड इंडिया पोर्टल में दर्ज करवाएं हैं। पट्टन वन परिक्षेत्र अधिकारी मस्तराम ने कहा कि तिंदी और म्याड़ क्षेत्र में हिमालयन घोरल होने की बात सुनी थी, लेकिन शोधार्थियों ने इसे भी कैमरे में कैद पर पुख्ता प्रमाण दिए हैं।