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किसी परिचय के मोहताज नहीं लोक गायक जगदीश

Mon, 16 Mar 2020 01:41 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, कुल्लू
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- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचली लोक कलाकारों में जगदीश शर्मा किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। बंजार के छोटे से गांव के जगदीश युवाओं के बीच खास जगह बना चुके हैं। बचपन से गाने के शौक ने इन्हें कलाकार बना दिया। जगदीश छठी कक्षा में पढ़ते थे जब उन्होंने पहला गाना गाया था। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह मेलों, त्योहारों में भी गाने गा चुके हैं। अब तक तीन दर्जन हिमाचली लोकगीतों में आवाज दे चुके हैं। इनमें कई गाने आज भी लोगों की जुबां पर हैं। 

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परिस्थितियां अनुकूल न होने के बावजूद 37 साल के जगदीश ने गाना जारी रखा। संगीत का शौक ऐसा चढ़ा कि वह एक स्टूडियो में काम करने पहुंच गए। जब दूसरे कलाकारों की रिकार्डिंग होती तो जगदीश भी गुनगुना लेते। कलाकारों को गीत गाता देख जगदीश ने भी ठान लिया वह भी ऐसे ही कलाकार बनेंगे।

अपने गुरु एसडी कश्यप से संगीत की बारीकियां सीखने के बाद वर्ष 2003 में जगदीश की पहली एलबम शर्मिला रिलीज हुई। इसके बाद हास्य फिल्म ऊझी रा खापरा में धिंगाधिगीये गीत से वाहवाही लूटी। ..दुई ठग, ..आई एक बांकी पड़ोसन, ...भेड़लू चरांदी धारे-धारे जांदी, ...कुल्लू आलिये देईए, ..शहरा नी बसणां, नी बसणां बाजारा आदि गीतों को भी लोगों ने काफी सराहा।
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जगदीश के पाकिस्तान पर भारत की सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित गीत को यू-ट्यूब पर दर्शकों से खूब प्यार मिला। उन्होंने कहा कि हिमाचल का लोक संगीत बहुत प्रसिद्ध है। इसका संरक्षण करने के लिए वह भविष्य में अपना प्रयास जारी रखेंगे। जल्द उनका एक वीडियो रिलीज होने जा रहा है। हिमाचली संगीत के साथ छेड़छाड़ बिल्कुल सही नहीं है। 

बॉलीवुड अभिनेता चंद्रचूड़ के साथ कर चुके हैं काम 
जगदीश शर्मा एक अच्छे कलाकार भी हैं। बॉलीवुड अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के साथ वह बॉलीवुड फिल्म चूड़ा एक प्रथा में काम कर चुके हैं। इसमें उन्होंने चंद्रचूड़ सिंह के बाडीगार्ड का किरदार निभाया था। वह अपने यू-ट्यूूब जुगनू प्रोडक्शन में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को बिना किसी शुल्क के गाने का अवसर दे रहे हैं।

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